हिमाचल प्रदेश

हिमाचल में फोरलेन निर्माण बना मुसीबत, घर-खेत बर्बाद, जिम्मेदार कौन?

Himachal News : हिमाचल प्रदेश में विकास की रफ्तार बढ़ाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर फोरलेन सड़कों का निर्माण किया जा रहा है, लेकिन इन परियोजनाओं ने हजारों परिवारों को उजाड़ दिया है। किरतपुर-मंडी-मनाली, परवाणू-शिमला, शिमला-मटौर और पठानकोट-मंडी फोरलेन के निर्माण से जहां पर्यटन और उद्योगों को फायदा होना था, वहीं निर्माण की लापरवाही ने लोगों की जमीन और मकान छीन लिए हैं।

गूगल की मदद से डीपीआर तैयार

केंद्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी माना कि किरतपुर-मनाली फोरलेन के आसपास हुई तबाही के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने वाली एजेंसियां जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि बिना जमीनी अध्ययन के, केवल गूगल मैप्स की मदद से डीपीआर तैयार की गई। यही लापरवाही आज बड़े नुकसान का कारण बन रही है।

सुंदरनगर का जयराम और नेरचौक का जोगिंद्र – उजड़ते परिवार

मंडी जिले के सुंदरनगर के चमुखा गांव निवासी जयराम का परिवार इसका जीता-जागता उदाहरण है। उनके घर से महज 30 फीट दूरी पर 90 डिग्री कोण पर पहाड़ काटा गया। जैसे ही कंपैक्ट रोलर चला, उनके घर की दीवारों में दरारें पड़ गई। नेरचौक के भौर गांव के किसान जोगिंद्र वालिया बताते हैं कि भूस्खलन ने उनके पुश्तैनी खेत पूरी तरह तबाह कर दिए।

शिमला में ताश के पत्तों की तरह ढहा भवन

शिमला के भट्ठाकुफर स्थित माठू कॉलोनी में परवाणू-शिमला फोरलेन के किनारे एक केस-2 कंक्रीट का साढ़े चार मंजिला भवन भारी बारिश में ढह गया। भवन मालिक रंजना वर्मा ने जीवनभर की कमाई से यह मकान बनाया था, लेकिन अब वे अपनी बहन के घर रहने को मजबूर हैं। रात में ढहने की वजह से आसपास के लोगों को भी जान बचाकर भागना पड़ा।

मुआवजा और वैज्ञानिक तकनीक का अभाव

फोरलेन भूमि अधिग्रहण मंच के अध्यक्ष बीआर कौंडल के अनुसार प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा नहीं दिया गया और न ही वैज्ञानिक मापदंडों के अनुसार निर्माण किया गया। यही कारण है कि आज हिमाचल प्रदेश संकट की स्थिति में है।

विशेषज्ञों की राय – “पहाड़ों की भौगोलिकता को समझें”

पूर्व आईएएस अधिकारी तरुण श्रीधर का कहना है कि अंग्रेजों के समय बना शिमला-कालका रेलवे ट्रैक आज भी भारी बरसात सह लेता है। सवाल यह है कि आधुनिक तकनीक से बनी फोरलेन सड़कें क्यों नहीं टिक पा रही हैं? उनका कहना है कि मैदानों की तकनीक यहां लागू करने की बजाय पहाड़ों की भौगोलिकता को ध्यान में रखकर काम होना चाहिए।

पर्यावरणविद् डॉ. ख्याल चंद का मानना है कि फोरलेन बनाना जरूरी है, लेकिन कटिंग का तरीका और बजट का उपयोग सबसे बड़ा सवाल है। वहीं, जेपी यूनिवर्सिटी वाकनाघाट के इंजीनियरिंग विशेषज्ञ डॉ. आलोक कुमार गुप्ता के अनुसार, सीधी कटिंग और कमजोर प्रोटेक्शन वॉल्स बरसात में विनाश को बढ़ावा दे रही हैं।

ये भी पढ़े – हिमाचल-उत्तराखंड में अलर्ट, पंजाब-पहाड़ी राज्यों में बिगड़े हालात

मंत्रियों ने भी जताई चिंता

लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने मनाली मार्ग पर बार-बार भूस्खलन पर चिंता जताई है और डीपीआर की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। वहीं, ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने भी कंपनी की कार्यशैली (Himachal News) पर सवाल उठाए, खासकर भट्ठाकुफर, ढली और कैथलीघाट में 90 डिग्री कटिंग को लेकर।

Shweta Gupta

Recent Posts

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बाद सीमा खन्ना पर निशाना, वोटर लिस्ट से जुड़ा क्या है विवाद?

Seema Khanna Election Commission: भारतीय चुनाव आयोग में वोटर लिस्ट और डिजिटल सिस्टम को लेकर…

6 minutes ago

एक्टर मुश्ताक खान के फैंस से बेटे मोहसिन की अपील, ‘गम नहीं उनकी यादें मनाएं’

Mushtaq Khan Death: बॉलीवुड अभिनेता मुश्ताक खान के निधन से फिल्म इंडस्ट्री में शोक की…

36 minutes ago

एशियन गेम्स 2026 में भारत के निशानेबाजों का जलवा, गोल्ड के साथ बनाया नया एशियाई रिकॉर्ड

India 10m Air Pistol Gold Medal: शुक्रवार को एशियाई खेलों में भारत ने शूटिंग के…

2 hours ago

Gold Price Today: फिर सस्ता हुआ सोना, दिल्ली में 24 कैरेट का भाव ₹1,52,820

Gold Price News: सोने की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है। 25 सितंबर की…

2 hours ago

दारोगा भर्ती परीक्षा में फिर उठे सवाल, खगौल सेंटर पर समय से पहले खुली प्रश्न पुस्तिकाओं की सील

Bihar Daroga Recruitment Exam: बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग की दारोगा भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी…

3 hours ago