GFRP Fiber Rebar: बिल्डिंग निर्माण में अब पारंपरिक लोहे की सरिया के साथ GFRP (ग्लास फाइबर रीइन्फोर्स्ड पॉलीमर) सरिया का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ रहा है। इसे आम भाषा में प्लास्टिक की सरिया कहा जाता है, लेकिन यह कांच के रेशों (ग्लास फाइबर) और रेजिन के मजबूत मिश्रण से तैयार होती है। इसकी पकड़ मजबूत होती है, इसलिए कई निर्माण परियोजनाओं में इसका उपयोग किया जा रहा है।
GFRP सरिया में जंग नहीं लगती, यह वजन में काफी हल्की होती है और इसलिए इसे ले जाना व लगाना आसान होता है। इसकी मजबूती स्टील से करीब दोगुनी मानी जाती है। नमी वाले वातावरण में भी इसकी उम्र 80 से 100 साल तक हो सकती है। इसके अलावा, इसमें बिजली का करंट नहीं दौड़ता, जिससे कुछ विशेष निर्माण कार्यों में यह अधिक सुरक्षित विकल्प बन जाती है।
इसकी सबसे बड़ी कमी यह है कि इसे मोड़ा नहीं जा सकता। इसी वजह से इसका उपयोग मुख्य रूप से सीधे या खड़े निर्माण कार्यों, जैसे पुल, नालियां, डिवाइडर और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में किया जाता है।
कीमत की बात करें तो प्रति टन GFRP सरिया, लोहे की टीएमटी सरिया से महंगी होती है। उदाहरण के तौर पर, जहां आयरन टीएमटी लगभग 40 हजार रुपये प्रति टन मिल सकती है, वहीं GFRP सरिया की कीमत करीब 1 लाख रुपये प्रति टन तक हो सकती है। हालांकि, इसका वजन काफी कम होने के कारण एक टन में इसकी मात्रा लोहे की सरिया की तुलना में लगभग दोगुनी या उससे भी अधिक होती है। इसलिए वजन और उपयोगिता के आधार पर यह कई मामलों में अधिक किफायती साबित हो सकती है।
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