Growing rift in India-Bangladesh relations
India Bangladesh Conflict: भारत और बांग्लादेश के बीच दशकों पुराने रिश्ते इस समय अपने सबसे नाजुक दौर से गुजर रहे हैं। बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार के सत्ता से हटने के बाद हालात तेजी से बदले हैं। कट्टरपंथी नेता उस्मान हादी की हत्या के बाद उपजा तनाव अब कूटनीतिक टकराव में बदलता दिख रहा है। हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि बांग्लादेश ने भारत में अपनी वीजा सेवाएं निलंबित करने का ऐलान कर दिया है।
भारत और शेख हसीना विरोधी कट्टरपंथी नेता उस्मान हादी की गोली मारकर हत्या के बाद बांग्लादेश में हिंसा फैल गई। कट्टरपंथी संगठनों ने आरोप लगाया कि हत्यारे भारत भाग गए हैं, हालांकि बांग्लादेश सरकार और भारत दोनों ने इन आरोपों को खारिज किया है।
हादी की मौत के बाद भारत विरोधी नारों और प्रदर्शनों में तेजी आई। कट्टरपंथी समूहों ने इस घटना को भारत के खिलाफ माहौल बनाने के लिए इस्तेमाल किया, जिससे देश में अराजकता बढ़ी।
ढाका और चटगांव में भारतीय मिशन के बाहर उग्र प्रदर्शन हुए। सुरक्षा हालात को देखते हुए भारत ने चटगांव स्थित अपने मिशन की सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित कर दीं।
हिंसा की आड़ में अल्पसंख्यक हिंदुओं को निशाना बनाया गया। मयमनसिंह में एक हिंदू युवक की ईशनिंदा के आरोप में पीट-पीटकर हत्या कर दी गई और बाद में शव जला दिया गया। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी।
हिंदू युवक की हत्या और अल्पसंख्यकों पर हमलों को लेकर संयुक्त राष्ट्र ने गंभीर चिंता जताई। भारत सरकार ने भी बांग्लादेश से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की।
अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस पर देश और विदेश दोनों तरफ से दबाव बढ़ता जा रहा है। हालात संभालने के लिए उन्होंने अमेरिका के दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के विशेष दूत से फोन पर बातचीत की और समय पर चुनाव कराने का भरोसा दिया।
तनाव के बीच बांग्लादेश ने भारत में अपनी वीजा सेवाएं निलंबित करने का ऐलान कर दिया। माना जा रहा है कि यह फैसला भारत द्वारा चटगांव में सेवाएं बंद करने के जवाब में लिया गया है।
उस्मान हादी के संगठन ने यूनुस सरकार को चेतावनी दी है कि अगर हत्यारों को सजा नहीं मिली, तो वे सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन छेड़ेंगे।
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हिंसा के खिलाफ भारत के कई शहरों दिल्ली, कोलकाता, हैदराबाद, सूरत और पटना में प्रदर्शन हुए। संगठनों ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
बांग्लादेश ने भारतीय उच्चायुक्त को समन जारी किया है। वहीं, हिंसा के दौरान मीडिया संस्थानों पर हमले और आगजनी ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मौजूदा हालात के लिए यूनुस सरकार को जिम्मेदार ठहराया है और कहा है कि कट्टरपंथी ताकतें देश की विदेश नीति को प्रभावित कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक बांग्लादेश में स्थायी और चुनी हुई सरकार नहीं बनती, तब तक भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव बना रह सकता है।
यह विवाद अब सिर्फ दो देशों के रिश्तों तक सीमित नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और मानवाधिकारों से भी जुड़ता जा रहा है।
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