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गुरु अस्त 2026: देवगुरु बृहस्पति के प्रभाव से किन राशियों को रहना होगा सतर्क

Guru Asta 2026: वैदिक ज्योतिष के अनुसार देवगुरु बृहस्पति को ज्ञान, भाग्य, सुख, समृद्धि, विवाह और संतान का कारक ग्रह माना जाता है। जब गुरु ग्रह अस्त (सूर्य के अत्यधिक निकट होने के कारण प्रभावहीन) होते हैं, तो उनका शुभ प्रभाव कुछ समय के लिए कमजोर माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, 9 अगस्त 2026 तक गुरु अस्त रहेंगे, जिसका असर सभी 12 राशियों पर अलग-अलग रूप में देखने को मिल सकता है।

क्या होता है गुरु अस्त

ज्योतिष शास्त्र में जब कोई ग्रह सूर्य के अत्यधिक निकट पहुंच जाता है तो उसे 'अस्त' माना जाता है। इस अवधि में उस ग्रह की शुभ फल देने की क्षमता कम मानी जाती है। गुरु के अस्त होने से शिक्षा, विवाह, करियर, आर्थिक फैसलों और धार्मिक कार्यों पर प्रभाव पड़ने की मान्यता है।

किन राशियों को रहना होगा अधिक सतर्क

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार मेष, मिथुन, कन्या, वृश्चिक और मकर राशि के जातकों को इस अवधि में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। इन राशियों के लोगों को कार्यों में देरी, आर्थिक दबाव, पारिवारिक मतभेद या करियर से जुड़े निर्णयों में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

हालांकि, यह प्रभाव प्रत्येक व्यक्ति की व्यक्तिगत जन्म कुंडली, दशा और ग्रहों की स्थिति पर भी निर्भर करता है। इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले विशेषज्ञ ज्योतिषी से व्यक्तिगत परामर्श लेना उचित माना जाता है।

क्या करें इस दौरान

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार गुरु अस्त की अवधि में धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ाना, जरूरतमंदों की सहायता करना, पीले रंग की वस्तुओं का दान करना और भगवान विष्णु तथा देवगुरु बृहस्पति की पूजा करना शुभ माना जाता है। साथ ही बड़े आर्थिक निवेश या महत्वपूर्ण निर्णय सोच-समझकर लेने की सलाह दी जाती है।

ध्यान रखें

ज्योतिष भविष्यवाणी का विषय नहीं, बल्कि ग्रहों की स्थिति के आधार पर संभावित प्रभावों का आकलन है। किसी भी प्रकार का निर्णय केवल राशिफल के आधार पर लेने के बजाय परिस्थितियों और विशेषज्ञ सलाह को भी महत्व देना चाहिए।

9 अगस्त 2026 तक गुरु अस्त रहने की अवधि को ज्योतिष में महत्वपूर्ण माना गया है। इस दौरान कुछ राशियों को अधिक सतर्क रहने की सलाह दी जाती है, जबकि सभी लोगों के लिए धैर्य, सकारात्मक सोच और सोच-समझकर निर्णय लेना लाभदायक माना जाता है। व्यक्तिगत कुंडली के अनुसार प्रभाव अलग-अलग हो सकते हैं।

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