D Suresh Corruption Case: हरियाणा ACB ने 26 अगस्त को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और धोखाधड़ी की धाराओं में केस दर्ज किया। गुरुग्राम के सेक्टर-23 में HSVP के 500 गज के प्लॉट को कथित तौर पर बेहद कम कीमत पर बहाल करने का मामला है।
1988 के डिफॉल्ट प्लॉट से जुड़ा मामला
1995 बैच के IAS अधिकारी डी. सुरेश 31 अगस्त को रिटायर हुए। इससे महज पांच दिन पहले, मुख्य सचिव की मंजूरी के बाद 26 अगस्त को ACB ने उनके खिलाफ FIR दर्ज की। आरोप है कि गुरुग्राम के पॉश सेक्टर-23 स्थित 500 गज के प्लॉट, जिसकी बाजार कीमत करीब ₹3.5 करोड़ और कलेक्टर रेट ₹1.75 करोड़ था, उसका मालिकाना हक महज ₹6.71 लाख में दे दिया गया। मामले की शुरुआत 1988 के एक डिफॉल्ट प्लॉट से हुई थी। बकाया भुगतान नहीं होने पर HSVP ने इसे 2002 में जब्त कर लिया था। करीब सात साल चली विजिलेंस जांच में सामने आया कि अधिकारियों और बाबुओं ने दूसरे प्लॉट की बहाली से जुड़े अदालती आदेश का सहारा लेकर कथित फर्जी नोटशीट तैयार की।
9 लोगों पर आरोप
मार्च 2019 में तत्कालीन चीफ एडमिनिस्ट्रेटर डी. सुरेश ने कथित तौर पर नियमों को दरकिनार कर प्लॉट की जब्ती रद्द की और बेहद कम कीमत पर कन्वेयंस डीड करवा दी। इससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान होने का आरोप है। तत्कालीन संपदा अधिकारी मुकेश कुमार समेत कुल 9 लोगों को आरोपी बनाया गया है।
हाईकोर्ट से अंतरिम राहत
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने डी. सुरेश को अंतरिम राहत देते हुए कहा कि हिरासत में लेने से पहले कम से कम 7 दिन का नोटिस देना होगा। अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को होगी। डी. सुरेश हाल में IPS वाई. पूरन कुमार के चर्चित सुसाइड केस में भी सामने आए थे। उन्होंने तत्कालीन DGP समेत 15 अधिकारियों पर सवाल उठाते हुए पीड़ित परिवार के समर्थन में आवाज उठाई थी। रिटायरमेंट के ठीक पहले हुई कार्रवाई और DSP स्तर की जांच से हरियाणा के प्रशासनिक हलकों में हलचल है।

