Heart Attack Risk in Young Indians: हार्ट अटैक अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहा। 20 और 30 की उम्र के युवाओं में भी कार्डियक घटनाएं बढ़ रही हैं, जिसे डॉक्टर चिंताजनक मानते हैं। KIMS अस्पताल, ठाणे के कार्डियक साइंसेज विभाग के निदेशक एवं HOD डॉ. बीसी कलमठ के अनुसार, अस्वस्थ जीवनशैली, तनाव और बिना पता चली स्वास्थ्य समस्याएं युवाओं में हृदय रोग का खतरा बढ़ा रही हैं।
स्मोकिंग और तनाव बड़ी वजह
डॉ. कलमठ के मुताबिक, कम उम्र में भी कई लोग धूम्रपान और तंबाकू का सेवन करते हैं। तनावपूर्ण नौकरियां, लंबे समय तक सफर, लगातार दबाव और स्वास्थ्य पर ध्यान न देना भी जोखिम बढ़ाता है। तेजी से बढ़ रही डायबिटीज के कारण अब 20 की उम्र में भी कई लोग इसके शिकार हो रहे हैं। स्मोकिंग, व्यायाम की कमी, मोटापा और तनाव ने भारत में कोरोनरी हार्ट डिजीज को गंभीर समस्या बना दिया है।
किन आदतों से बढ़ता है खतरा?
भारत में हृदय रोग का बोझ बढ़ने के पीछे मोटापा, निष्क्रिय जीवनशैली, धूम्रपान, कम उम्र में डायबिटीज और अनियंत्रित ब्लड प्रेशर प्रमुख कारण हैं। कई युवा अपने BP, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर की स्थिति से अनजान रहते हैं और समस्या गंभीर होने के बाद ही जांच कराते हैं।
साल में एक बार कराएं जांच
डॉक्टर ने 20-30 वर्ष के युवाओं को साल में कम से कम एक बार स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह दी है। नियमित रूप से कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर की जांच जरूरी है। रोजाना 20-30 मिनट व्यायाम करने से वजन, कोलेस्ट्रॉल और हृदय स्वास्थ्य को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
डायबिटीज या हाई BP का समय पर पता न चलने और नियंत्रित न होने पर इनके विकसित होने के एक साल के भीतर भी हार्ट अटैक हो सकता है। सीने में दर्द या असहजता, सांस फूलना, जबड़े में दर्द, पीठ के ऊपरी हिस्से में दर्द और बिना वजह ज्यादा पसीना आना चेतावनी संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर कार्डियोलॉजिस्ट तक पहुंचने से कई समस्याओं का प्रभावी इलाज संभव है।
दक्षिण एशियाई लोगों में ज्यादा जोखिम
डॉ. कलमठ के अनुसार, भारतीयों समेत दक्षिण एशियाई लोगों में पेट के आसपास जमा चर्बी (सेंट्रल ओबेसिटी), हाई ट्राइग्लिसराइड और कोलेस्ट्रॉल का खतरा अधिक होता है, जो अक्सर जांच के बिना रह जाते हैं। समय पर इलाज से भविष्य में कार्डियक घटनाओं का जोखिम काफी घटाया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से कोलेस्ट्रॉल और BP की दवाएं लेना तथा नियमित शुगर जांच कराना हृदय रोग को एक से दो दशक तक टालने में मदद कर सकता है।
डॉ. कलमठ ने युवाओं को कम उम्र से ही हृदय स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की सलाह दी। नियमित व्यायाम, स्वस्थ वजन बनाए रखना और हर साल कोलेस्ट्रॉल, BP व डायबिटीज की जांच कराना हार्ट अटैक के जोखिम को काफी कम कर सकता है।
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