Wednesday, Sep 02

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Pak में 100 साल पुराने हिंदू मंदिर के विध्वंस पर भारत सख्त, कहा- अल्पसंख्यक धरोहर की सुरक्षा में नाकामी चिंताजनक

Pakistan Hindu Temple Demolition: भारत ने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के नरोवाल जिले में एक सदी से ज्यादा पुराने हिंदू मंदिर के कथित विध्वंस की कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्रालय ने इसे अल्पसंख्यक समुदाय के पूजा स्थल के खिलाफ चिंताजनक कार्रवाई बताते हुए पाकिस्तानी अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

भारत ने मांगी पारदर्शी जांच

लाहौर से करीब 130 किलोमीटर दूर सिराज गांव स्थित मंदिर को 21 अगस्त को गिराए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि नई दिल्ली ने इन खबरों पर ‘गहरी चिंता’ जताई है। उन्होंने इसे सदी पुराने अल्पसंख्यक पूजा स्थल के खिलाफ निंदनीय तोड़फोड़ बताया। भारत ने पाकिस्तान से मामले की तत्काल और पारदर्शी जांच, दोषियों पर कार्रवाई और मंदिर को बहाल करने की मांग की। साथ ही अल्पसंख्यकों की सुरक्षा तथा उनकी धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत की रक्षा सुनिश्चित करने को कहा।

मदरसे के लिए जमीन हड़पने का आरोप

पाकिस्तान मसिहा मिल्लत पार्टी (PMMP), हिंदू प्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि मंदिर को जानबूझकर गिराया गया और इसकी जमीन का इस्तेमाल पास के मदरसे के लिए किया जाना था। PMMP अध्यक्ष असलम परवेज सहोत्रा ने 28 अगस्त को पंजाब के अतिरिक्त गृह सचिव से मुलाकात कर शिकायत दी। सहोत्रा ने प्रतिबंधित कट्टरपंथी संगठन तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) के सदस्यों पर विध्वंस में शामिल होने का आरोप लगाया। उनका दावा है कि मंदिर के शिखर की धातु, ईंटें और अन्य सामान भी हटा लिए गए। उनके अनुसार, मंदिर से लगी जमीन पहले एवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) ने मदरसे के लिए लीज पर दी थी, लेकिन किराया न मिलने और जमीन का निर्धारित उपयोग न होने पर लीज रद्द कर दी गई थी।

पाकिस्तानी अधिकारियों का अलग दावा

ETPB अधिकारी राणा इफ्तिखार ने कहा कि मंदिर मूसलाधार बारिश के कारण ढह गया। उन्होंने इसकी उम्र 100 से 125 साल से अधिक बताई, लेकिन कहा कि ETPB के रिकॉर्ड में मंदिर का कोई नाम दर्ज नहीं है। उनके मुताबिक मंदिर की अपनी जमीन लीज पर नहीं दी गई थी, जबकि उससे लगी जमीन सेमिनरी के लिए लीज पर दी गई थी। मंदिर के पुनर्निर्माण पर फैसला वरिष्ठ अधिकारी करेंगे। सहोत्रा ने आरोप लगाया कि 29 जनवरी 2026 के ETPB आदेश में सेमिनरी की लीज रद्द कर अवैध कब्जाधारियों को हटाने और संपत्ति सील करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन इसे लागू नहीं किया गया। उन्होंने 11 अप्रैल की DSP नरोवाल की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि पुलिस को मंदिर की सुरक्षा संबंधी चिंताओं और संभावित नुकसान की जानकारी थी। पाकिस्तान में हिंदू अल्पसंख्यकों के मंदिरों की सुरक्षा, अतिक्रमण, जबरन धर्मांतरण और समुदाय पर हमलों को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ता और अल्पसंख्यक नेता सरकार पर पर्याप्त सुरक्षा नहीं देने का आरोप लगाते रहे हैं।

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