दुनिया

भारत-EU की ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ पर अंतिम मुहर? दावोस से दिल्ली तक बढ़ी हलचल

India-EU Trade Deal: दुनिया की दो बड़ी आर्थिक ताकतों के बीच एक ऐतिहासिक समझौते का रास्ता अब लगभग साफ हो चुका है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने संकेत दिया है कि भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच बहुप्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की घोषणा अगले हफ्ते हो सकती है। उन्होंने इस प्रस्तावित समझौते को इतना बड़ा बताया कि कूटनीतिक गलियारों में इसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” कहा जा रहा है।

2 अरब लोगों को जोड़ेगी डील

स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 के मंच से बोलते हुए वॉन डेर लेयेन ने कहा कि यह समझौता करीब 2 अरब लोगों के बाजार को एक साथ जोड़ेगा और दुनिया की कुल GDP के लगभग एक चौथाई हिस्से को कवर करेगा। उन्होंने बताया कि दावोस सम्मेलन के तुरंत बाद वे भारत दौरे पर आ रही हैं, जहां इस ऐतिहासिक डील को अंतिम रूप दिए जाने की पूरी संभावना है।

क्यों खास है ये समझौता?

यूरोपीय आयोग प्रमुख ने कहा कि यह डील यूरोप को दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते और सबसे गतिशील बाजारों में मजबूत पकड़ बनाने का मौका देगी। भारत के लिए भी यह समझौता निवेश, तकनीक, मैन्युफैक्चरिंग और रोजगार के नए दरवाजे खोल सकता है। दोनों पक्षों की कोशिश है कि व्यापार के साथ-साथ निवेश, डिजिटल टेक्नोलॉजी, रक्षा सहयोग और सप्लाई चेन सिक्योरिटी को भी इस समझौते का हिस्सा बनाया जाए।

वैश्विक राजनीति का असर

वॉन डेर लेयेन ने अपने बयान में यह भी साफ किया कि रूस-यूक्रेन युद्ध, ऊर्जा संकट और तकनीकी प्रतिस्पर्धा ने यूरोप को रणनीतिक फैसले लेने पर मजबूर किया है। उन्होंने कहा कि यूरोप अब ऊर्जा, कच्चे माल, रक्षा और डिजिटल सेक्टर में तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है, और भारत इस रणनीति का सबसे अहम साझेदार बन सकता है।

लंबा रहा है इंतजार

भारत और EU के बीच रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत 2004 में हुई थी। FTA पर बातचीत 2007 में शुरू हुई, लेकिन कई मतभेदों के चलते 2013 में इसे रोक दिया गया। करीब 9 साल के ब्रेक के बाद जून 2022 में वार्ता फिर शुरू हुई। अब तीन साल की बातचीत के बाद दोनों पक्ष अंतिम चरण में पहुंच गए हैं।

क्या बदल जाएगा खेल?

अगर यह समझौता हो जाता है, तो यह भारत और यूरोप के रिश्तों को सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि इसे एक नई वैश्विक ताकत के रूप में स्थापित करेगा। आने वाले दिनों में दिल्ली और ब्रसेल्स के बीच होने वाली बातचीत दुनिया की अर्थव्यवस्था की दिशा तय कर सकती है। अब सबकी निगाहें अगले हफ्ते होने वाले भारत-EU समिट पर टिकी हैं जहां शायद दुनिया की सबसे बड़ी ट्रेड डील पर मुहर लग जाए।

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Shagun Chaurasia

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