New Delhi: पासपोर्ट को नागरिकता और सरकारी लाभों के लिए पात्रता का प्रमाण मानने को लेकर बढ़ती भ्रम की स्थिति के बीच विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया है कि भारतीय पासपोर्ट मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला दस्तावेज है, इसे नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। हालांकि पासपोर्ट केवल भारतीय नागरिकों को ही जारी किया जाता है।
पासपोर्ट सेवाओं में बड़ा सुधार
सरकार के अनुसार कई मामलों में पासपोर्ट जारी होने का समय घटकर पांच कार्यदिवस रह गया है, जबकि पासपोर्ट सेवा केंद्रों (PSK) में आवेदकों का औसत समय 45 मिनट से कम हो गया है। मई 2025 से सभी नए पासपोर्ट में ICAO मानकों के अनुरूप सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक चिप वाले ई-पासपोर्ट जारी किए जा रहे हैं, जिससे सुरक्षा बढ़ेगी और धोखाधड़ी कम होगी।
नेटवर्क विस्तार और बढ़ती वैश्विक पहुंच
देशभर में अब 545 पासपोर्ट सेवा केंद्र कार्यरत हैं, जो एक दशक पहले की तुलना में छह गुना वृद्धि है। इस वर्ष 20 नए केंद्र खोले जाएंगे और 2027 तक हर लोकसभा क्षेत्र में कम से कम एक पासपोर्ट सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। दूरदराज क्षेत्रों में मोबाइल टीमें और विशेष शिविरों के जरिए पिछले वर्ष लगभग 3 लाख लोगों को पासपोर्ट जारी किए गए।
भारत की केवल 10% आबादी के पास पासपोर्ट है। वहीं भारत ने यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और खाड़ी देशों सहित 25 देशों के साथ 27 मोबिलिटी समझौते किए हैं। भारतीय पासपोर्ट धारकों को 27 देशों में वीजा-फ्री, 47 देशों में वीजा-ऑन-अराइवल और 66 देशों में ई-वीजा सुविधा मिल रही है।
विदेश रोजगार और प्रवासी कल्याण
अक्टूबर 2022 से eMigrate 2.0 पोर्टल के माध्यम से करीब 7 लाख भारतीय श्रमिकों को इमिग्रेशन क्लियरेंस मिला है। 17 पासपोर्ट कार्यालयों में रैंडम प्रोसेसिंग सिस्टम लागू किया गया है। विदेश जाने वाले श्रमिकों को सांस्कृतिक और कौशल प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। अगले सप्ताह भारत जर्मनी, इटली, जापान, रूस और डेनमार्क की भागीदारी वाला मानव संसाधन मोबिलिटी फोरम आयोजित करेगा। खाड़ी देशों और सिंगापुर में संकटग्रस्त भारतीय महिलाओं के लिए कानूनी व मनोवैज्ञानिक सहायता केंद्र भी स्थापित किए गए हैं। सरकार का लक्ष्य पासपोर्ट को सीमित लोगों की सुविधा से आगे बढ़ाकर करोड़ों भारतीयों के लिए सुलभ बनाना है।

