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ईरान में सत्ता बदली तो भारत के लिए सुनहरा मौका या बड़ा झटका, जानिए आज के एक्सप्लेनर में…

impact of regime change in Iran on India: ईरान में कट्टरपंथी सरकार की आर्थिक नीतियों के खिलाफ उग्र प्रदर्शन बढ़ता जा रहा है। वहीं, अमेरिका ने सैन्य हस्तक्षेप के संकेत दिए हैं। जिससे हालात जटिल हो गए हैं और भारत हालात पर बारीकी से नजर रख रहा है। भारत का ईरान के साथ ऐतिहासिक संबंध रहा है और ये हमारी पश्चिम एशिया नीति के लिए भी अहम है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन भारत के लिए क्या मायने रखता है।

चाबहार बंदरगाह में भारत का 550 मिलियन डॉलर का निवेश

ईरान का चाबहार बंदरगाह भारत के लिए रणनीति के नजरिए से बेहद अहम माना जाता है। इसलिए भारत ने अब तक इस बंदरगाह पर कुल 550 मिलियन डॉलर का निवेश किया है। दरअसल, यह बंदरगाह भारत को जमीन व रेल के जरिए पाकिस्तान को बाईपास करते हुए ईरान से जोड़ता है। विकसित भारत के लिए सरकार ने यहां अरबों रुपए का निवेश किया है। ऐसे में अगर ईरान में स्थिरता जारी रहती है तो वह अपनी योजना के मुताबिक व्यापारिक लक्ष्यों को हासिल करने से दूर हो जाएगा।

ईरान-भारत में इन चीज़ों की होती है लेन-देन

ईरान भारत का 8वां सबसे बड़ा बिजनेस पार्टनर है। दोनों देशों के बीच तेल के अलावा चावल, चाय, चीनी, दवाइयां, मशीनरी, सूखे मेवे और रसायन का आयात-निर्यात होता रहा है। वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान भारत-ईरान के बीच 19,000 करोड़ रुपये का द्विपक्षीय व्यापार हुआ, जो बीते वर्ष की तुलना में 21.76 प्रतिशत ज्यादा है। इस दौरान ईरान को भारत का निर्यात 13,000 करोड़ रुपये ईरान से भारत का आयात 6,000 करोड़ रुपये का रहा।

कश्मीर के मुद्दे पर भारत को ईरान का मिला था साथ

ईरान ऐतिहासिक रूप से पाकिस्तान के प्रभाव को संतुलित करता रहा है। राजधानी तेहरान का शिया नेतृत्व पाकिस्तान में सुन्नी चरमपंथी समूहों का आलोचक रहा है। जो अक्सर भारत विरोधी टिप्पणियां करते हैं। 1990 के दशक में पाकिस्तान ने कश्मीर को लेकर भारत पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाने की कोशिश की तो ईरान ने भारत का समर्थन किया। वर्तमान में ईरान में उथल-पुथल से पाकिस्तान को इनडायरेक्ट फायदा होगा।

ईरान में चीन का बढ़ता प्रभाव

भारत के अलावा ईरान का चीन के साथ रिश्ता बहुत मजबूत है। 2021 में ईरान और चीन के बीच 25 साल का रणनीतिक समझौता हुआ। वर्ष 2025 में चीन, ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था। पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था कमजोर हुई है और वह सस्ता तेल बेचने और इंफ्रस्ट्रक्चर के लिए चीन पर निर्भर हो गया है। ऐसे में ईरान में भारत की मौजूदगी से वहां चीन के प्रभाव को थोड़ा संतुलित किया जा सकता है।

ईरान में सत्ता का उलटफेर होता है, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान चीन को हो सकता है और इसके मुकाबले भारत अपेक्षाकृत सुरक्षित स्थिति में रह सकता है।

ये भी पढ़ें: ईरान ने इज़रायल पर लगाया प्रदर्शनकारियों को हथियार देने का आरोप, कहा- अमेरिका को इज़रायल जाना चाहिए

Shagun Chaurasia

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