US Venezuela Tension
US Venezuela Tension: मादुरो युग के अचानक अंत के बाद वेनेजुएला में सत्ता और नीतियों दोनों की दिशा बदलती दिख रही है। कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने पहली बार राष्ट्र को संबोधित करते हुए ऐसे संकेत दिए हैं, जिनसे देश के तेल उद्योग में बड़े बदलाव की आहट मिल रही है। उनके 44 मिनट के संबोधन का सबसे बड़ा संदेश साफ था, वेनेजुएला अब अपने तेल क्षेत्र को विदेशी निवेशकों के लिए खोलने की तैयारी में है। इस ऐलान के साथ ही अमेरिकी दबाव और नई सत्ता की प्राथमिकताओं पर बहस तेज हो गई है।
अपने संबोधन में रोड्रिगेज ने आर्थिक पुनर्निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि तेल उद्योग को लेकर एक नई नीति तैयार की गई है और वेनेजुएला के राजनयिकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे वैश्विक निवेशकों तक इस नीति की जानकारी पहुंचाएं। सरकार का दावा है कि तेल बिक्री से होने वाली आय को सीधे राष्ट्रीय बजट में शामिल किया जाएगा और इसका इस्तेमाल आम जनता की भलाई के लिए किया जाएगा।
स्वास्थ्य सेवाओं और बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करना इस रोडमैप का अहम हिस्सा बताया गया। रोड्रिगेज ने संकेत दिए कि पिछले वर्षों में इन क्षेत्रों की हालत बिगड़ी और अब इन्हें पुनर्जीवित करना सरकार की जिम्मेदारी है। संदेश स्पष्ट था तेल से मिलने वाला पैसा विकास का इंजन बनेगा।
रोड्रिगेज के बयान में अमेरिका की भूमिका को लेकर संकेतों की कमी नहीं थी। अमेरिकी प्रशासन पहले ही यह कह चुका है कि वेनेजुएला के तेल से होने वाली कमाई का उपयोग जनता की भलाई में होना चाहिए। दिलचस्प बात यह है कि कार्यवाहक राष्ट्रपति ने भी लगभग यही बात दोहराई। इससे यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या नई तेल नीति वॉशिंगटन के दबाव में आकार ले रही है।
अमेरिका द्वारा निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी को लेकर रोड्रिगेज ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे दोनों देशों के रिश्तों पर “धब्बा” बताया। हालांकि, इसी भाषण में उन्होंने द्विपक्षीय संवाद की वकालत भी की। उनका कहना था, “हमें कूटनीति से डरना नहीं चाहिए। अगर मैं वॉशिंगटन जाऊंगी तो सिर ऊंचा रखकर जाऊंगी, झुककर नहीं।” यह दोहरी रणनीति साफ झलकी एक ओर राष्ट्रीय स्वाभिमान का संदेश, दूसरी ओर अमेरिका से बातचीत के दरवाज़े खुले रखने की कोशिश।
भाषण के दौरान मंच पर निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी की तस्वीरें मौजूद थीं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम मादुरो समर्थकों को भरोसे में लेने की कोशिश हो सकता है, ताकि सत्ता परिवर्तन के बाद देश में असंतोष न पनपे। साथ ही, सरकार यह भी दिखाना चाहती है कि वह अमेरिका को पूरी तरह नाराज़ किए बिना संतुलन बना सकती है।
मादुरो की गिरफ्तारी के एक दिन बाद ही कार्यवाहक सरकार ने पूर्व सरकार के दौरान गिरफ्तार किए गए कई कैदियों को रिहा कर दिया। इससे यह संदेश गया कि नई सत्ता राजनीतिक माहौल को नरम करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। बताया गया है कि 3 जनवरी को अमेरिका ने ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ के तहत कार्रवाई करते हुए निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लिया और उन्हें अमेरिका ले जाया गया। फिलहाल मादुरो वहां मुकदमे का सामना कर रहे हैं। इसी बीच डेल्सी रोड्रिगेज को वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति नियुक्त किया गया।
तेल नीति में बदलाव, विदेशी निवेश की तैयारी और अमेरिका से संवाद ये सभी संकेत वेनेजुएला के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत कर रहे हैं। लेकिन बड़ा सवाल यही है: क्या यह बदलाव देश की मजबूरी है या वॉशिंगटन की शर्तों पर लिखा जा रहा नया भविष्य? आने वाले दिनों में वेनेजुएला की राह इसी सवाल का जवाब देगी।
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