ईरानी ‘जुल्फिकार’ का खौफ!
Israel Ballistic Missile Attack: ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष अब और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। युद्ध के 28वें दिन ईरान ने ऐसी मिसाइलों की बौछार की, जिसने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने इजराइल और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर 400 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिनमें सबसे ज्यादा चर्चा ‘जुल्फिकार’ मिसाइल की हो रही है।
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने अपने सैन्य अभियान “ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस-4” के तहत कई चरणों में हमले किए। 76वीं, 77वीं और 82वीं वेव में ‘जुल्फिकार’ मिसाइलों को खास तौर पर तैनात किया गया, जिससे तेल अवीव, हाइफा और दिमोना जैसे अहम इलाकों में नुकसान की खबरें सामने आई हैं।
‘जुल्फिकार’ ईरान की फतेह-110 मिसाइल सीरीज की एक एडवांस बैलेस्टिक मिसाइल है, जिसे 2016 में विकसित किया गया था। इसका नाम इस्लामिक इतिहास की मशहूर तलवार ‘जुल्फिकार’ पर रखा गया है।
• रेंज: 700 से 1000 किलोमीटर तक
• वजन: लगभग 4,600 किलोग्राम
• वारहेड: 450–600 किलोग्राम (हाई-एक्सप्लोसिव/क्लस्टर)
• फ्यूल: सॉलिड फ्यूल—तेजी से लॉन्च की क्षमता
• गाइडेंस: INS + GPS, बेहद सटीक निशाना
सबसे खतरनाक पहलू यह है कि उड़ान के दौरान इसका वारहेड अलग हो जाता है, जिससे इसे ट्रैक करना और रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि आधुनिक डिफेंस सिस्टम भी इसे पूरी तरह रोक नहीं पा रहे।
इस मिसाइल का एक खास वेरिएंट ‘ज़ोल्फ़ागर बसीर’ भी है, जिसे जहाजों को निशाना बनाने के लिए तैयार किया गया है। इसमें ऑप्टिकल सीकर लगा होता है, जिससे यह समुद्र में भी सटीक हमला कर सकता है। खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिक ठिकानों को निशाना बनाने में इसका इस्तेमाल हुआ है।
सिर्फ जुल्फिकार ही नहीं, ईरान की अन्य उन्नत मिसाइलें भी इस युद्ध में तबाही मचा रही हैं।
• रेंज: 1000 किलोमीटर
• वारहेड: 600 किलोग्राम
• तेज लॉन्च: सॉलिड फ्यूल के कारण तुरंत फायर
• उपयोग: लंबी दूरी के सैन्य ठिकानों और लॉजिस्टिक हब पर हमला
इसके अलावा ‘हज कासिम’ और ‘खैबर शेकन’ जैसी नई पीढ़ी की मिसाइलें भी सटीक हमलों के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं।
इजराइल और अमेरिका के पास मौजूद एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम जैसे एरो, पैट्रियट और थाड भी इन हमलों के सामने दबाव में नजर आ रहे हैं। हालांकि इजराइल ने दावा किया है कि उसने करीब 92% मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर लिया, लेकिन बाकी मिसाइलों ने नुकसान पहुंचाया और सुरक्षा व्यवस्था की सीमाएं उजागर कर दीं।
ईरान की ये सभी मिसाइलें मोबाइल लॉन्चर (TEL) से दागी जा रही हैं, जिससे इन्हें छिपाना और अचानक हमला करना आसान हो जाता है। यही कारण है कि जवाबी हमलों के बावजूद ईरान लगातार हमले करने में सक्षम है।
अमेरिका और इजराइल ने ईरान के अहम मिसाइल उत्पादन केंद्रों को निशाना बनाया है, लेकिन इसके बावजूद हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे। हाल ही में अमेरिका ने ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमले को कुछ समय के लिए टाल दिया है, जिससे संकेत मिलते हैं कि यह संघर्ष लंबा चल सकता है।
मिसाइलों की यह जंग अब सिर्फ सीमित हमलों तक नहीं रही, बल्कि यह एक लंबी और रणनीतिक लड़ाई में बदलती जा रही है। सवाल यही है क्या डिफेंस सिस्टम इस खतरे को रोक पाएंगे, या आने वाले दिनों में और बड़े हमले देखने को मिलेंगे?
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