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जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो के सामने उठाया वीजा का मुद्दा, जवाब सुनकर बढ़ी भारत की उम्मीदें

भारत और अमेरिका के रिश्ते लगातार नए आयाम छू रहे हैं। रक्षा, व्यापार, तकनीक और रणनीतिक साझेदारी जैसे कई क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ा है। लेकिन इसी बीच अमेरिकी वीजा नियमों और भारतीय नागरिकों को होने वाली परेशानियों का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ हुई अहम बैठक में इस विषय को प्रमुखता से उठाया। बैठक के दौरान भारत ने साफ शब्दों में कहा कि वीजा प्रक्रिया में देरी, बढ़ती जांच और भारतीय छात्रों व पेशेवरों को होने वाली दिक्कतें चिंता का विषय हैं। इस पर अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो ने भरोसा दिलाते हुए कहा कि अमेरिका की नीतियां भारत को निशाना बनाकर नहीं बनाई जा रही हैं और दोनों देशों के मजबूत रिश्ते भविष्य में और गहरे होंगे।

भारत ने क्यों उठाया वीजा का मुद्दा

पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र, आईटी प्रोफेशनल्स और कारोबारी अमेरिका जा रहे हैं। H-1B वीजा, स्टूडेंट वीजा और बिजनेस वीजा के लिए भारत दुनिया के सबसे बड़े आवेदक देशों में शामिल है। लेकिन हाल के समय में कई भारतीयों को वीजा इंटरव्यू में लंबा इंतजार, अतिरिक्त दस्तावेजों की मांग और आवेदन प्रक्रिया में देरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा है। भारत का मानना है कि दोनों देशों के मजबूत संबंधों के बीच ऐसी बाधाएं लोगों के बीच संपर्क को प्रभावित करती हैं। यही कारण है कि जयशंकर ने यह मुद्दा सीधे अमेरिकी नेतृत्व के सामने रखा। भारत चाहता है कि कुशल पेशेवरों, छात्रों और कारोबारियों के लिए प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और आसान बनाई जाए।

रुबियो ने क्या कहा

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका भारत के साथ अपने रिश्तों को बेहद महत्वपूर्ण मानता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा और इमिग्रेशन से जुड़े कुछ कदम वैश्विक स्तर पर लागू किए जाते हैं और इन्हें किसी एक देश के खिलाफ नहीं देखा जाना चाहिए। रुबियो ने कहा कि भारत अमेरिका का रणनीतिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच लोगों का आदान-प्रदान रिश्तों की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है। उन्होंने यह भी संकेत दिए कि भविष्य में वीजा प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और तेज बनाने पर काम किया जा सकता है।

भारत-अमेरिका रिश्तों में क्यों अहम है यह मुद्दा

भारत और अमेरिका के बीच संबंध केवल सरकारों तक सीमित नहीं हैं। लाखों भारतीय अमेरिका में पढ़ाई, नौकरी और व्यापार से जुड़े हुए हैं। अमेरिकी टेक कंपनियों में भारतीय पेशेवरों की बड़ी भूमिका है, जबकि भारतीय छात्र अमेरिकी विश्वविद्यालयों की अर्थव्यवस्था में भी बड़ा योगदान देते हैं। ऐसे में यदि वीजा प्रक्रिया कठिन होती है, तो इसका असर केवल यात्रियों पर नहीं बल्कि शिक्षा, व्यापार और तकनीकी सहयोग पर भी पड़ता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में दोनों देशों को अपने आर्थिक और रणनीतिक हितों को मजबूत बनाए रखने के लिए लोगों के आवागमन को आसान बनाना होगा।

भारतीय आईटी सेक्टर लंबे समय से H-1B वीजा पर निर्भर रहा है। अमेरिका की कई बड़ी कंपनियों में भारतीय इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ काम करते हैं। हालांकि हाल के वर्षों में वीजा नियमों में सख्ती और जांच प्रक्रिया बढ़ने से भारतीय कंपनियों और कर्मचारियों की चिंताएं भी बढ़ी हैं। वहीं दूसरी ओर अमेरिका जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है। लेकिन इंटरव्यू स्लॉट की कमी, लंबा इंतजार और वीजा रिजेक्शन की घटनाओं ने छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। भारत ने इसी संदर्भ में अमेरिका से प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने की मांग की है।

रणनीतिक साझेदारी के बीच संवेदनशील मुद्दा

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका आज इंडो-पैसिफिक क्षेत्र, रक्षा सहयोग और चीन की बढ़ती चुनौती जैसे मुद्दों पर एक-दूसरे के करीब हैं। ऐसे समय में वीजा जैसे मुद्दे संवेदनशील बन जाते हैं क्योंकि इनका सीधा असर दोनों देशों के नागरिकों पर पड़ता है। जयशंकर द्वारा यह मुद्दा उठाना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि भारत अब अपने नागरिकों से जुड़े मामलों पर खुलकर और मजबूती से बात कर रहा है। वहीं रुबियो का जवाब यह दर्शाता है कि अमेरिका भी भारत के साथ संबंधों को लेकर सतर्क और सकारात्मक रुख बनाए रखना चाहता है।

क्या बदल सकती है अमेरिकी वीजा नीति

हालांकि फिलहाल किसी बड़े बदलाव की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन कूटनीतिक स्तर पर हुई यह बातचीत भविष्य के संकेत जरूर देती है। माना जा रहा है कि अमेरिका भारतीय आवेदकों के लिए वीजा प्रोसेसिंग समय कम करने और तकनीकी सुधारों पर विचार कर सकता है। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि अमेरिका भारतीय प्रतिभाओं को नजरअंदाज नहीं कर सकता, क्योंकि टेक्नोलॉजी, रिसर्च और हेल्थ सेक्टर में भारतीयों की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

जयशंकर और रुबियो की मुलाकात केवल एक औपचारिक कूटनीतिक बैठक नहीं थी, बल्कि यह उन मुद्दों पर गंभीर चर्चा का मंच भी बनी जो सीधे लाखों भारतीयों से जुड़े हैं। भारत ने वीजा संबंधी चिंताओं को मजबूती से रखा, जबकि अमेरिका ने भरोसा दिलाया कि भारत उसके निशाने पर नहीं है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले महीनों में अमेरिका अपनी वीजा प्रक्रिया में कितना बदलाव करता है और क्या भारतीय छात्रों व पेशेवरों को इससे वास्तविक राहत मिलती है।

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Lavanya Dayal

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