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जयंत चौधरी पर चढ़ा बीजेपी का रंग! जाट-मुस्लिम नहीं अब RLD की ‘जाट-ब्राह्मण’ केमिस्ट्री

by | Jul 20, 2026 | News Top

Jayant Chaudhary RLD Strategy: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच राष्ट्रीय लोक दल (RLD) ने संगठनात्मक स्तर पर बड़ा बदलाव किया है। केंद्रीय मंत्री और RLD प्रमुख जयंत चौधरी ने पार्टी के वरिष्ठ नेता अनुपम मिश्रा को कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। इस फैसले को केवल संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच पार्टी की नई रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

संगठन को मजबूत करने की कवायद

RLD लंबे समय तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान राजनीति और जाट-मुस्लिम सामाजिक समीकरण के आधार पर अपनी पहचान बनाए हुए थी। लेकिन पिछले एक दशक में प्रदेश की राजनीति में हुए बदलावों के बाद पार्टी नए सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों पर काम करती नजर आ रही है। अनुपम मिश्रा को बड़ी जिम्मेदारी सौंपने को इसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।

'जाट-ब्राह्मण' समीकरण पर बढ़ा जोर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ब्राह्मण समाज से आने वाले अनुपम मिश्रा को प्रदेश स्तर पर अहम जिम्मेदारी देकर RLD ने जाट समुदाय के साथ ब्राह्मण मतदाताओं तक अपनी पहुंच मजबूत करने का संकेत दिया है। इससे पार्टी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी अपना जनाधार बढ़ाने की कोशिश कर सकती है।

2013 के बाद बदले पश्चिमी यूपी के हालात

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में वर्ष 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के बाद जाट और मुस्लिम समुदायों के बीच लंबे समय से चला आ रहा राजनीतिक समीकरण काफी हद तक बदल गया था। इसके बाद क्षेत्र की राजनीति में नए गठजोड़ और नई चुनावी रणनीतियां उभरकर सामने आईं। ऐसे में RLD भी बदलते सामाजिक समीकरणों के अनुरूप अपनी राजनीतिक रणनीति को नया स्वरूप देने की कोशिश कर रही है।

2027 विधानसभा चुनाव पर नजर

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए सभी राजनीतिक दल संगठन विस्तार और सामाजिक समीकरणों को साधने में जुटे हैं। RLD का यह कदम भी आगामी चुनावों के मद्देनजर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, नई रणनीति का वास्तविक असर चुनावी मैदान में ही स्पष्ट होगा।

अनुपम मिश्रा को कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने से RLD ने यह संकेत दिया है कि पार्टी बदलते राजनीतिक माहौल के अनुसार अपनी रणनीति को नया रूप देने की कोशिश कर रही है। हालांकि, 'जाट-ब्राह्मण' समीकरण को लेकर हो रही चर्चा राजनीतिक विश्लेषण का विषय है और इसका प्रभाव आगामी विधानसभा चुनावों के नतीजों में ही स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

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