J&K CIK Raid Digital Terror Network: जम्मू-कश्मीर में आतंकी नेटवर्क के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई लगातार तेज हो रही है। इसी कड़ी में काउंटर-इंटेलिजेंस कश्मीर (CIK) ने शनिवार सुबह घाटी के पांच जिलों में एक साथ तलाशी अभियान चलाया। बारामूला, शोपियां, अनंतनाग, कुपवाड़ा और बांदीपोरा में कई संदिग्ध ठिकानों पर की गई इस कार्रवाई का मुख्य फोकस कथित डिजिटल गतिविधियों और आतंकवाद से जुड़े ऑनलाइन नेटवर्क की जांच करना रहा।
सुबह करीब 5 बजे शुरू हुई कार्रवाई
अधिकारियों के अनुसार, CIK की अलग-अलग टीमों ने शनिवार तड़के करीब 5 बजे एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया। कई स्थानों पर यह कार्रवाई कई घंटे तक चली। सुरक्षा एजेंसियां उन गतिविधियों की जांच कर रही हैं, जिनके जरिए कथित तौर पर सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल आतंकवाद और कट्टरपंथ को बढ़ावा देने के लिए किया गया। यह अभियान CIK श्रीनगर पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR नंबर 03/2023 की जांच का हिस्सा बताया जा रहा है।
सोशल मीडिया गतिविधियों की भी जांच
जांच एजेंसियों के अनुसार, मामले में सोशल मीडिया और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म के कथित दुरुपयोग की पड़ताल की जा रही है। आशंका है कि ऑनलाइन माध्यमों के जरिए आतंकवाद का महिमामंडन करने, युवाओं को कट्टरपंथ की ओर प्रभावित करने और प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के लिए भर्ती का माहौल तैयार करने की कोशिश की गई। इस मामले में IPC की धारा 505 और 153-A के अलावा UAPA की धारा 13 और 18 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
मोबाइल, लैपटॉप और अन्य उपकरणों की तलाश
तलाशी के दौरान CIK की टीमों ने डिजिटल सामग्री और जांच से संबंधित दस्तावेजों की तलाश की। अधिकारियों के मुताबिक, कुछ स्थानों से मोबाइल फोन, लैपटॉप, पेन ड्राइव और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं। इन उपकरणों से मिलने वाले डेटा की फोरेंसिक जांच की जा सकती है। जांचकर्ताओं को उम्मीद है कि डिजिटल सामग्री से संदिग्ध संपर्कों, ऑनलाइन गतिविधियों और कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कार्रवाई के दौरान कितने लोगों को हिरासत में लिया गया है या आगे कितने लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
डिजिटल नेटवर्क पर क्यों है एजेंसियों की नजर
सुरक्षा एजेंसियों के सामने आतंकवाद का तरीका भी समय के साथ बदल रहा है। अब जांच केवल हथियारबंद मॉड्यूल या जमीन पर सक्रिय नेटवर्क तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया, मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और अन्य ऑनलाइन माध्यमों के कथित इस्तेमाल पर भी सुरक्षा एजेंसियां नजर रख रही हैं। जांच का एक प्रमुख हिस्सा ऐसे डिजिटल संपर्कों की पहचान करना है, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर प्रचार, संपर्क स्थापित करने या युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा की ओर प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है।
घाटी में सुरक्षा अभियान तेज
जम्मू-कश्मीर में हाल की आतंकी घटनाओं के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने अपने अभियानों को और तेज किया है। सुरक्षा बल सक्रिय आतंकियों के साथ-साथ उनके संभावित मददगारों, संपर्क सूत्रों और अन्य सहयोगियों की भी जांच कर रहे हैं। इसी रणनीति के तहत जमीन पर तलाशी अभियान चलाने के साथ डिजिटल नेटवर्क की भी निगरानी बढ़ाई जा रही है। एजेंसियों का मानना है कि आतंकी ढांचे को कमजोर करने के लिए उसके प्रचार, संपर्क और कथित सहायता नेटवर्क पर भी कार्रवाई जरूरी है।
फोरेंसिक जांच से खुल सकते हैं कई राज
अब जांच का अगला चरण बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से मिलने वाली जानकारी पर निर्भर करेगा। फोरेंसिक जांच के जरिए अधिकारियों को कथित डिजिटल नेटवर्क के संपर्कों और गतिविधियों से जुड़े नए सुराग मिलने की उम्मीद है।
फिलहाल CIK की जांच जारी है और अधिकारियों के अनुसार, आने वाले दिनों में इस मामले में और कार्रवाई हो सकती है।
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