JP Nadda Sonam Wangchuk Protest: देश में परीक्षा प्रणाली और पेपर लीक के मुद्दे को लेकर जारी आंदोलन के बीच घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया है। केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सक्रिय भूमिका निभाते हुए आंदोलनकारी पक्ष से लगातार संवाद किया। उनकी पहल के बाद 26 दिनों से अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना उपवास समाप्त कर दिया। अब सभी की निगाहें सरकार और आंदोलनकारी संगठनों के बीच होने वाली आगे की बातचीत पर टिकी हैं।
संसद मार्च के बाद बढ़ा राजनीतिक दबाव
20 जुलाई को छात्र संगठनों और आंदोलनकारियों की ओर से संसद मार्च निकाला गया। संसद परिसर के आसपास बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जुटने के कारण सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करनी पड़ी। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी, जिसके बाद राजनीतिक माहौल भी गर्मा गया। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को संसद में जोर-शोर से उठाया और परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक की जांच तथा सरकार की जवाबदेही की मांग की। लगातार बढ़ते दबाव के बीच सरकार ने बातचीत का रास्ता अपनाया।
जेपी नड्डा ने संभाली बातचीत की जिम्मेदारी
सरकार की ओर से जेपी नड्डा ने आंदोलनकारी प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी मांगों को विस्तार से सुना। उन्होंने भरोसा दिलाया कि परीक्षा प्रणाली में सामने आई अनियमितताओं पर गंभीरता से कार्रवाई की जाएगी और संसद में इस विषय पर चर्चा कराने का प्रयास किया जाएगा। इसके अलावा, उन्होंने पुलिस कार्रवाई में घायल हुए प्रदर्शनकारियों से अस्पताल जाकर मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। इस कदम को सरकार की ओर से संवाद स्थापित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
सोनम वांगचुक ने खत्म किया अनशन
लगातार 26 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक से भी जेपी नड्डा ने मुलाकात की। बातचीत के दौरान परीक्षा प्रणाली, छात्रों की सुरक्षा और जवाबदेही जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। लिखित आश्वासन मिलने के बाद सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त करने की घोषणा की। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन का उद्देश्य केवल अनशन नहीं था, बल्कि परीक्षा व्यवस्था में स्थायी सुधार सुनिश्चित कराना है। इसलिए अब सरकार के वादों को लागू होते देखना सबसे महत्वपूर्ण होगा।
आंदोलन खत्म होगा या जारी रहेगा
सरकार और आंदोलनकारी पक्ष के बीच संवाद का दौर जारी है। हालांकि कई मांगों पर सकारात्मक संकेत मिले हैं, लेकिन कुछ मुद्दों पर अब भी सहमति बनना बाकी है। विशेष रूप से शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर आंदोलनकारी संगठन अपने रुख पर कायम हैं। आने वाले दिनों में होने वाली बैठकों के नतीजे यह तय करेंगे कि आंदोलन पूरी तरह समाप्त होगा या आगे भी जारी रहेगा।
जेपी नड्डा की सक्रिय पहल के बाद सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संवाद का रास्ता खुला है। सोनम वांगचुक का अनशन समाप्त होना एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है, लेकिन परीक्षा प्रणाली में सुधार और जवाबदेही से जुड़े मुद्दों पर अंतिम समाधान अभी बाकी है। अब सभी की नजर सरकार द्वारा किए गए आश्वासनों के क्रियान्वयन और आगामी बैठकों के परिणाम पर टिकी है।
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