Judge Ravi Kumar Diwakar: हाल ही में उत्तर प्रदेश की न्यायपालिका में एक नाम लगातार चर्चा में बना हुआ है। यह नाम है जज रवि कुमार दिवाकर का, जिन्होंने पिछले करीब तीन महीनों के दौरान अलग-अलग आपराधिक मामलों में कुल 13 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। लगातार आए इन फैसलों ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। इससे पहले भी वह वाराणसी के बहुचर्चित ज्ञानवापी विवाद से जुड़े आदेशों के कारण सुर्खियों में रह चुके हैं।
रवि कुमार दिवाकर वर्तमान में उत्तर प्रदेश में विशेष न्यायाधीश के रूप में कार्यरत हैं। पिछले कुछ महीनों में उन्होंने हत्या और अन्य गंभीर अपराधों से जुड़े कई मामलों में सुनवाई पूरी करते हुए कुल 13 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। इन मामलों में अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों और अभियोजन पक्ष की दलीलों के आधार पर दोष सिद्ध होने के बाद फैसला सुनाया। इन फैसलों ने एक बार फिर यह चर्चा तेज कर दी है कि गंभीर अपराधों में न्यायपालिका किस तरह कानून के अनुसार सख्त रुख अपना रही है। हालांकि, भारतीय न्याय व्यवस्था में फांसी की सजा केवल दुर्लभ से दुर्लभतम मामलों में ही दी जाती है।
रवि कुमार दिवाकर का नाम पहली बार देशभर में तब चर्चा में आया था, जब वह वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद-श्रृंगार गौरी विवाद से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहे थे। वर्ष 2022 में उन्होंने परिसर का अदालती सर्वे (Commission Survey) कराने का आदेश दिया था। इसी सर्वे के दौरान परिसर में एक संरचना मिलने का दावा किया गया था, जिसे लेकर हिंदू और मुस्लिम पक्षों के बीच अलग-अलग दावे सामने आए। इस आदेश के बाद ज्ञानवापी मामला राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया था और आगे की सुनवाई उच्च न्यायालय तथा सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंची।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी न्यायाधीश का फैसला अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों और कानून के प्रावधानों पर आधारित होता है। फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद भी दोषियों को उच्च न्यायालय, सर्वोच्च न्यायालय और संवैधानिक उपायों के तहत अपील तथा दया याचिका का अधिकार प्राप्त रहता है। इसलिए निचली अदालत का फैसला अंतिम नहीं माना जाता।
लगातार कई मामलों में कठोर सजा सुनाने और पहले से ही देश के सबसे चर्चित धार्मिक-न्यायिक विवादों में शामिल रहने के कारण रवि कुमार दिवाकर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। न्यायपालिका में उनके हालिया फैसलों को गंभीर अपराधों के प्रति सख्त न्यायिक रुख के रूप में देखा जा रहा है, वहीं ज्ञानवापी प्रकरण में उनकी भूमिका उन्हें पहले ही राष्ट्रीय पहचान दिला चुकी है।
रवि कुमार दिवाकर का नाम एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। एक ओर उन्होंने गंभीर आपराधिक मामलों में लगातार फांसी की सजा सुनाकर ध्यान आकर्षित किया है, तो दूसरी ओर ज्ञानवापी विवाद में दिए गए उनके आदेश पहले से ही उन्हें चर्चित न्यायाधीशों की सूची में शामिल कर चुके हैं। हालांकि, प्रत्येक मामले में अंतिम कानूनी निर्णय उच्च न्यायिक प्रक्रियाओं और अपील के बाद ही तय होता है।
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