Kanpur digital arrest scam: कानपुर में खुद को CBI और क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर एक बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट करने वाले गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। आरोपियों ने डर दिखाकर 48.20 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। बुजुर्ग जब करीब 1 करोड़ रुपये की FD तुड़वाने बैंक पहुंचे, तब कर्मचारियों को शक हुआ और साइबर ठगी का राज खुल गया।
CBI अधिकारी बनकर किया फोन
कानपुर के स्वरूपनगर निवासी योगेश चंद्र मिश्रा को आरोपियों ने फोन किया। पुलिस के मुताबिक, उन्होंने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच और CBI का अधिकारी बताया। कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराया गया। इसके बाद अलग-अलग बैंक खातों में करीब 48.20 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए गए। पीड़ित लगातार आरोपियों के दबाव में रहा।
₹1 करोड़ की FD तुड़वाने पहुंचे तो हुआ शक
ठगी का खुलासा तब हुआ जब योगेश चंद्र मिश्रा करीब 1 करोड़ रुपये की FD तुड़वाने बैंक पहुंचे। बैंक कर्मचारियों को मामले में कुछ संदिग्ध लगा। उन्होंने पुलिस को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद जांच शुरू हुई। जांच आगे बढ़ी तो डिजिटल अरेस्ट के नाम पर चल रहे साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क की जानकारी सामने आने लगी।
फर्जी कंपनी बनाकर खोला बैंक खाता
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों की मदद से BAUKOYO CONTRACTORS PRIVATE LIMITED नाम की फर्म तैयार की और उसके नाम पर बैंक खाता खुलवाया। इस खाते में 15 लेनदेन के जरिए करीब 25.98 लाख रुपये जमा हुए। पुलिस के अनुसार, यह रकम उसी दिन अलग-अलग राज्यों के करीब 611 बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी गई।
तीन आरोपी गिरफ्तार, एक फरार
साइबर थाना पुलिस ने मामले में वासु, आतिश कुमार और कंचन प्रजापति को गिरफ्तार किया है। वहीं, मुकुल चौबे फरार बताया जा रहा है। पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन से बैंक खातों की जानकारी, फर्जी दस्तावेज, कॉल रिकॉर्ड और WhatsApp चैट समेत कई डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं।
अब तक ₹1.42 करोड़ की ठगी का अनुमान
पुलिस के मुताबिक, NCRP पर हुई जांच में इन बैंक खातों से जुड़े चार साइबर अपराध सामने आए हैं। जांच के आधार पर अब तक करीब 1.42 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का अनुमान लगाया गया है। पुलिस मामले में आरोपियों से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है।
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