Friday, Sep 04

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काशी की सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा सम्मान, दिल्ली में 6 सितंबर को होगा ‘काशी-रत्न सम्मान 2026’ समारोह

Kashi Ratna Samman 2026: काशी की सनातन सांस्कृतिक परंपरा, आध्यात्मिक चेतना, ज्ञान, कला और लोकमंगल की विरासत को समर्पित एक विशेष समारोह का आयोजन 6 सितंबर को नई दिल्ली में किया जाएगा। ‘काशी-रत्न सम्मान 2026’, ‘सहजानंद सरस्वती सेवाश्री सम्मान 2026’ और ‘स्वरात्मिका संगीत महोत्सव’ का आयोजन रविवार को शाम 4 बजे से 7 बजे तक कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में होगा। कार्यक्रम सी.सी.आर.टी., संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त निरीक्षण में आयोजित किया जा रहा है।

कई विशिष्ट हस्तियां रहेंगी मौजूद

समारोह में पद्मभूषण रामबहादुर राय, अध्यक्ष, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, नई दिल्ली, पद्म श्री अशोक भगत, पद्म श्री प्रो. डॉ. सुनील डबास (द्रोणाचार्य पुरस्कार सम्मानित), पूर्व राजदूत एवं भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी ओमप्रकाश गुप्ता, आचार्य (डॉ.) अनिल कुमार राय, कुलपति, महामना ज्योतिबाफुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय, बरेली, और प्रो. सुनील कुमार विश्वकर्मा, अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश राज्य ललित कला अकादमी सहित शिक्षाविद, कला-संस्कृति विशेषज्ञ, समाजसेवी और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग शामिल होंगे।

तीन हस्तियों को मिलेगा ‘काशी-रत्न सम्मान’

समारोह में स्वर्गीय डॉ. रघुनाथ सिंह, स्वर्गीय ‘लोकबंधु’ राजनारायण और पद्मश्री अशोक भगत को ‘काशी-रत्न सम्मान 2026’ से सम्मानित किया जाएगा।
वहीं समाजसेवा, शिक्षा, चिकित्सा, संगीत, पर्यावरण, सांस्कृतिक संरक्षण और लोककल्याण के क्षेत्र में योगदान के लिए 20 व्यक्तित्वों को ‘सहजानंद सरस्वती सेवाश्री सम्मान 2026’ दिया जाएगा। सम्मान पाने वालों में परशुराम सिंह, प्रो. रामराज उपाध्याय, डॉ. सुभाष सरदार सिंह राजपूत, डॉ. श्रीमती शोभना तेहरा राजपूत, श्रीमती जमुना शुक्ला, सुखदेव मिश्रा, डॉ. एन. मूर्ति, कपिन्द्र नाथ तिवारी, बृजेश सिंह, डॉ. खुशबू, डॉ. आशीष तिवारी, वैभव कुमार सिंह, डॉ. तेजस्वी एच.आर, वेद व्यास, अन्तरा झा, रामबाबू सिंह, रजनीश कुमार, यज्ञदत्त त्यागी, डॉ. संदीप कुमार तिवारी और विवेक जोशी शामिल हैं।

काशी की सांस्कृतिक विरासत और लोकमंगल की परंपरा को मिलेगा मंच

आयोजकों के अनुसार, समारोह का उद्देश्य काशी की सांस्कृतिक विरासत के माध्यम से ज्ञान-साधना, शास्त्र-लोक, तर्क-श्रद्धा, कला-अध्यात्म और लोकमंगल की परंपराओं को एक मंच पर सामने लाना है। कार्यक्रम में समाजसेवा और सांस्कृतिक संरक्षण में योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित कर भारतीय संस्कृति की जीवंत परंपरा को आगे बढ़ाने का संदेश दिया जाएगा।

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