कौशल्या देवी बंसल ने 62 साल की उम्र में 10वीं की परीक्षा पास कर पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होने का संदेश दिया।
कहते हैं कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। छत्तीसगढ़ के महासमुंद की कौशल्या देवी बंसल ने इस कहावत को अपनी जिंदगी में सच साबित कर दिखाया है। 62 साल की उम्र में 10वीं की बोर्ड परीक्षा पास करके उन्होंने न सिर्फ अपना अधूरा सपना पूरा किया, बल्कि उन लोगों के लिए भी मिसाल कायम की है जो उम्र या परिस्थितियों के कारण पढ़ाई बीच में छोड़ देते हैं।
खास बात यह है कि कौशल्या देवी के तीन बच्चे सरकारी सेवा में बड़े पदों पर हैं। उनका एक बेटा GST विभाग में अपर आयुक्त है, दूसरा बेमेतरा में पुलिस अधीक्षक के पद पर कार्यरत है और बेटी राजनांदगांव में संयुक्त कलेक्टर हैं। इसके बावजूद कौशल्या देवी ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए खुद को दोबारा विद्यार्थी बनाया।
कौशल्या देवी का शुरुआती जीवन पारिवारिक जिम्मेदारियों से घिरा रहा। कम उम्र में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी और इसके बाद गृहस्थी तथा परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ती चली गईं।
हालांकि शिक्षा पूरी न कर पाने की इच्छा उनके मन में बनी रही। उन्होंने अपने जीवन में सामाजिक और सार्वजनिक जिम्मेदारियां भी निभाईं और नगर पालिका की उपाध्यक्ष जैसी जिम्मेदारी संभाली। लेकिन पढ़ाई पूरी करने का उनका सपना अधूरा ही रहा।
समय बीतने के साथ जब पारिवारिक जिम्मेदारियां कुछ कम हुईं तो कौशल्या देवी ने अपने पुराने सपने को पूरा करने का फैसला किया। उन्होंने उम्र की परवाह किए बिना दोबारा पढ़ाई शुरू की।
सबसे पहले उन्होंने 8वीं की बोर्ड परीक्षा देने की तैयारी की। करीब 60 वर्ष की उम्र में परीक्षा पास करके उन्होंने साबित किया कि सीखने की इच्छा हो तो लंबे अंतराल के बाद भी पढ़ाई शुरू की जा सकती है।
8वीं पास करने के बाद उनका आत्मविश्वास और बढ़ गया। इसके बाद उन्होंने अगली मंजिल के तौर पर 10वीं की परीक्षा को चुना।
कौशल्या देवी ने 10वीं की परीक्षा की तैयारी शुरू की और नियमित रूप से पढ़ाई की। उम्र बढ़ने के बावजूद उन्होंने परीक्षा की तैयारी में मेहनत की और आखिरकार 62 साल की उम्र में 10वीं की बोर्ड परीक्षा पास कर ली।
उनकी यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि जिस उम्र में ज्यादातर लोग पढ़ाई से दूर हो जाते हैं, उस उम्र में उन्होंने किताबें उठाकर अपने अधूरे लक्ष्य को पूरा किया।
उनकी कहानी यह संदेश देती है कि किसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए उम्र से ज्यादा जरूरी इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास है।
कौशल्या देवी के परिवार में भी उनकी उपलब्धि को लेकर गर्व का माहौल है। उनके तीन बच्चे सरकारी सेवा में महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत हैं।
उनका बेटा श्रवण बंसल GST विभाग में अपर आयुक्त के पद पर हैं। दूसरा बेटा त्रिलोक बंसल बेमेतरा जिले में SP के रूप में सेवाएं दे रहा है। उनकी बेटी राजनांदगांव में संयुक्त कलेक्टर के पद पर कार्यरत हैं।
वहीं उनके एक अन्य बेटे मनीष बंसल कारोबार संभालते हैं। ऐसे परिवार के बीच कौशल्या देवी का खुद दोबारा पढ़ाई शुरू करना और 10वीं पास करना उनकी व्यक्तिगत इच्छाशक्ति को दर्शाता है।
किसी व्यक्ति के लिए उम्र के इस पड़ाव पर दोबारा पढ़ाई शुरू करना आसान नहीं होता। कौशल्या देवी को इस सफर में परिवार का पूरा सहयोग मिला।
उनके पति रमेश बंसल, बेटे श्रवण बंसल और परिवार के अन्य सदस्यों ने उन्हें पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया। परिवार के समर्थन ने उन्हें अपने लक्ष्य तक पहुंचने का हौसला दिया।
कौशल्या देवी बंसल की कहानी सिर्फ 10वीं की परीक्षा पास करने तक सीमित नहीं है। यह उन लोगों के लिए प्रेरणा है जिन्होंने किसी वजह से अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ दी और बाद में उसे पूरा करने की इच्छा मन में रखी।
उन्होंने दिखाया कि जीवन में जिम्मेदारियां कितनी भी बड़ी क्यों न हों, अगर सीखने और आगे बढ़ने की इच्छा कायम रहे तो अधूरे सपने को दोबारा पूरा किया जा सकता है।
62 साल की उम्र में 10वीं पास करने वाली कौशल्या देवी बंसल की कहानी यही संदेश देती है कि पढ़ाई और सीखने की कोई अंतिम उम्र नहीं होती।
IIT Bombay Student Death: IIT बॉम्बे के 20 वर्षीय BTech छात्र के माता-पिता ने मुंबई…
Rahul Gandhi Vote Chori Allegation: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को मुख्य…
AI E-Waste: दुनिया में AI का इस्तेमाल बढ़ने के साथ डेटा सेंटर और कंप्यूटिंग मशीनों…
Meerut: मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट के ध्वस्तीकरण से प्रभावित करीब 650 व्यापारियों को…
ECINet Voter Deletion Rollback: चुनाव आयोग ने India Today को बताया कि ECINet सिस्टम में…
CJP Gyanesh Kumar Resignation Demand: नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर Cockroach Janta Party (CJP)…