Ayatollah Ali Khamenei: ईरानी मीडिया ने अमेरिका और इजरायल के हमले में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की पुष्टि की है। बताया जा रहा है जब हमला किया गया तब खामेनेई अपने घर में ही मीटिंग कर रहे थे। इजरायल और अमेरिका ने खुफिया जानकारी के बाद ये हमला किया। इसके साथ ही ईरान में 36 साल से चले आ रहे शासन का अंत हो गया। एक रिपोर्ट के मुताबिक इजरायल और अमेरिका ने खामेनेई के ठिकाने पर लगातार बमों से हमला किया, जिसके बाद उनका सीक्रेट कंपाउंड पूरी तरह ध्वस्त हो गया।
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रमजान के महीने के दौरान 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई की। माना जा रहा है कि शनिवार की सुबह में तेहरान समेत ईरान के कई शहरों में धमाके हुए। इसके बाद घोषणा की गई कि यह अमेरिका और इजरायल का संयुक्त हमला है। जवाब में ईरान ने ईज़रायल की तरफ सैकड़ों मिसाइलें दागी। इसके अलावा ईरान ने कतर, बहरीन, साउदी अरब समेत अन्य देशों में बने अमेरिकी बेस पर भी हमले किए। हमलों को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत हो चुकी है। इसके कुछ देर पर ईरानी मीडिया ने भी खामेनेई के मारे जाने की सूचना दी।
तेहरान स्थित यूनिवर्सिटी के पास बने सीक्रेट कंपाउंड में ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई अपने अधिकारियों के साथ मीटिंग कर रहे थे। इसी दौरान कंपाउंड इराजयल और अमेरिका ने करीब 30 बम गिराए। ये बम काफी ताकतवर थे। रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली फाइटर जेट ने तेहरान में खामेनेई के कंपाउंड पर 30 बंकर बस्टर बम (Bunker Buster Bomb) गिराए थे। इसे सैटेलाइट तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है। हमले से पहले कंपाउंड बिल्कुल ठीक दिख रहा है, लेकिन हमले के बाद कंपाउंड पूरी तरह ध्वस्त दिख रहा है। यानी 86 साल के खामेनेई की शनिवार तड़के मारे गए। इस तरह उनका 36 सालों का शासन समाप्त हो गया।
इस्लामी क्रांति के 2 साल बाद खामेनेई पर जानलेवा हमला हुआ था। यह हमला एक टेप रिकॉर्ड में ब्लास्ट के जरिए किया गया। यह ब्लास्ट इतना जोरदार था कि खामेनेई का दाया हाथ पैरालाइज हो गया और एक कान से सुनने की शक्ति भी कम हो गई थी। बताया जाता है कि उस वक्त इस हमले का आरोप मुजाहिदीन-ए-ख़ल्क़ (एमईके) पर लगा। जो इस्लामी शासन के खिलाफ था।
ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई का राजनीतिक सफर काफी संघर्षों से भरा रहा। वर्ष 1979 में इस्लामी क्रांति के बाद वे ईरान के एक प्रमुख स्तंभ बने। वर्ष 1980 के दशक में इराक के साथ खूनी युद्ध के दौरान वे ईरान के राष्ट्रपति थे। इस युद्ध ने उनके मन में पश्चिमी देशों विशेषकर अमेरिका के प्रति गहरा अविश्वास पैदा कर दिया। अयातुल्ला खुमैनी की मृत्यु के बाद 1989 में खामेनेई को ईरान का सर्वोच्च नेता चुना गया। तब से लेकर आज तक, ईरान की सेना, अर्थव्यवस्था और विदेशी नीति पर उनका एकछत्र राज था।
ईरान में सुप्रीम लीडर का पद संवैधानिका है। ऐसे में खामेनेई के बाद इस पद के लिए उनके मोजतबा खामेनेई को प्रबल दावेदार मानाा रहा है। वह भी अपने पिता की तरह ही एक प्रमुख शिया धर्मगुरु हैं। पिछले कुछ सालों में 56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई ईरान की राजनीति में एक शक्तिशाली व्यक्तित्व के रूप में उभरे हैं। हालांकि, उन्होंने अब तक कोई औपचारिक पद नहीं संभाला है। लेकिन ईरान प्रशासन में उनकी मजबूत पकड़ है। वह ईरान के अलावा लंदन में भी रहें हैं। अगर वह ईरान के सुप्रीम लीडर बनते हैं तो उनके पास सेना, न्यायपालिका, राष्ट्रपति के बड़े पदों पर नियुक्तियां और विदेश नीति से जुड़े फैसले तय करेंगे।
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