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किम जोंग उन से मिलने से पहले 1 महीने की ट्रेनिंग, कब बोलना है-कैसे खड़ा होना है… पूर्व राजनयिक ने खोले राज

by | Aug 30, 2026 | दुनिया

Kim Jong Un meeting rules: उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन से मुलाकात किसी सामान्य राजनीतिक बैठक जैसी नहीं होती। उत्तर कोरिया के पूर्व राजनयिक ली इल-ग्यू के मुताबिक, किम से मिलने वाले लोगों को करीब एक महीने की विशेष ट्रेनिंग दी जाती है। इसमें उन्हें बताया जाता है कि किम के सामने कैसे खड़ा होना है, कब बोलना है और बातचीत के दौरान किस तरह की बॉडी लैंग्वेज रखनी है। ली किम से सात बार मिल चुके हैं।

किम सवाल पूछें तभी करें बात

ली इल-ग्यू, जो उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय में डिप्टी डायरेक्टर रह चुके हैं, के अनुसार किम के सामने अनावश्यक हरकत, बार-बार हिलना-डुलना या खुद से बातचीत शुरू करना नियमों के खिलाफ है। अगर किम उनकी ओर आएं तो घबराकर पीछे हटने के बजाय शांत होकर एक तरफ हटना होता है।

किम के सवाल पूछने पर जवाब छोटा, सीधा और सटीक होना चाहिए। किसी सवाल का उत्तर न पता हो तो जानकार होने का दिखावा नहीं करना चाहिए। ली का दावा है कि किम के आसपास की बातचीत और गतिविधियां रिकॉर्ड की जाती हैं। उनके सचिव उनकी कही बातों को भी नोट करते हैं। इन रिकॉर्डिंग्स को देश के 'क्रांतिकारी इतिहास' का हिस्सा बताया जाता है। ऐसे में झूठ बोलना जोखिम भरा हो सकता है।

पहली मुलाकात में कांप रही थी आवाज

ली ने बताया कि पहली बार एयरपोर्ट के VIP वेटिंग रूम में किम से मिलने पर वह इतने नर्वस थे कि अपनी आवाज कांपती हुई सुन रहे थे। हालांकि उन्होंने खुद को संभाल लिया, क्योंकि लगातार तनाव में रहकर काम करना संभव नहीं था और गलती के गंभीर परिणाम हो सकते थे। उनके मुताबिक किम से मिलना सरकारी प्रचार में बताए जाने जैसा 'भगवान से मिलने' का अनुभव नहीं था, लेकिन यह सामान्य मुलाकात भी नहीं थी।

क्यूबा के राष्ट्रपति की यात्रा में मिली जिम्मेदारी

नवंबर 2018 में ली ने क्यूबा के तत्कालीन राष्ट्रपति मिगेल डियाज-कैनेल की दो दिवसीय उत्तर कोरिया यात्रा के कार्यक्रमों का समन्वय किया था। इसमें किम के साथ बातचीत, सरकारी भोज और प्योंगयांग के मे डे स्टेडियम का कार्यक्रम शामिल था। ली के अनुसार उनकी बातचीत ज्यादातर किम के सवालों के जवाब देने तक सीमित रहती थी। किम विमान, खाने की पसंद और क्यूबा की आबादी जैसी बातें पूछते थे।

ली का कहना है कि किम के सामने खुद को खास दिखाने, जरूरत से ज्यादा तारीफ करने या बनावटी मुस्कान देने से बचना चाहिए। उन्होंने किम को हंसते और दूसरों के प्रति विचारशील भी देखा है, लेकिन साथ ही उत्तर कोरिया में उनकी सत्ता की ताकत को भी करीब से महसूस किया, जहां उन्हें चुनौती देने वाली कोई प्रभावी ताकत नहीं है।

दुभाषिए की एक गलती और 'क्रिटिसिज्म सेशन'

ली ने करीब 60 वर्षीय एक दुभाषिए का किस्सा भी सुनाया। उनके मुताबिक, किम की बात के बीच बोलने पर वह नाराज हुए और दुभाषिए को 'बदतमीज' या 'असभ्य' कहा। कथित तौर पर उसे किम के आसपास दोबारा न आने का आदेश दिया गया। अधिकारियों को लगा कि उसकी जिंदगी खत्म हो गई, हालांकि एक रिश्तेदार के शक्तिशाली ऑर्गनाइजेशन एंड गाइडेंस डिपार्टमेंट से जुड़े होने के कारण वह कथित तौर पर मौत की सजा से बच गया।

बाद में उसे करीब एक सप्ताह के 'क्रिटिसिज्म सेशन' में अपने काम और व्यवहार की आलोचना लिखनी पड़ी। ली के मुताबिक, किम की एक आलोचना भी किसी व्यक्ति की किस्मत बदल सकती है। ली का दावा है कि सात मुलाकातों में उन्होंने हर बार तनाव महसूस किया। उनके अनुभव में किम के भीतर एक सामान्य इंसान की झलक भी दिखी और बेलगाम सत्ता रखने वाले शासक की कठोरता भी।

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