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अतीत को छोड़ना क्यों है जरूरी? एक्सपर्ट ने बताया भावनात्मक बोझ से मुक्त होने का आध्यात्मिक तरीका

Letting Go Spiritual Healing: 'अतीत को भूल जाओ' कहना आसान है, लेकिन ऐसा करना हमेशा सरल नहीं होता। डॉ. प्रिया कौल के अनुसार, हम अक्सर किसी घटना को नहीं, बल्कि उससे जुड़े अर्थ और विश्वास को पकड़े रहते हैं। यही कारण है कि पुराने दर्द, अपराधबोध, गुस्सा या असफलताएं लंबे समय तक हमारी सोच, फैसलों और रिश्तों को प्रभावित करती रहती हैं।

दर्द को पहचान नहीं बनने दें

एक खराब रिश्ता आपको खुद को प्यार के लायक न मानने पर मजबूर कर सकता है, वहीं करियर की एक असफलता आत्मविश्वास छीन सकती है। कई बार नाराजगी भी इसलिए बनी रहती है क्योंकि वह हमारे दर्द की याद दिलाती है। एक्सपर्ट के मुताबिक, जब हम इन्हें अपनी पहचान बना लेते हैं, तो अतीत वर्तमान पर हावी हो जाता है।

हीलिंग का मतलब भूलना नहीं

डॉ. कौल कहती हैं कि अतीत को छोड़ने का मतलब न तो उसे मिटाना है और न ही गलत करने वालों को माफ करना। इसका अर्थ है उन अनुभवों से सीख लेकर उन्हें अपने भविष्य की पहचान न बनने देना। खुद से पूछें, "मैं अभी भी किस भावना को पकड़े हुए हूं?" यह सवाल आपकी वर्तमान मानसिक स्थिति को समझने में मदद करता है।

यही है आध्यात्मिक बदलाव की शुरुआत

हीलिंग तब शुरू होती है जब आप यह पूछते हैं, "उस अनुभव से गुजरने के बाद मैं अब क्या बन सकता हूं?" नई परिस्थितियों में पुराने डर, उम्मीदें या माफी की प्रतीक्षा छोड़ना भावनात्मक आजादी की ओर पहला कदम है। डॉ. कौल के अनुसार, अतीत को छोड़ना भविष्य पर भरोसा करना और यह स्वीकार करना है कि हमारी पहचान हमारे दर्द से कहीं बड़ी है।

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