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लखनऊ अलीगंज अग्निकांड: 15 परिवारों का दर्द, धुआं बना सबसे बड़ा दुश्मन

Lucknow Fire Accident: लखनऊ के अलीगंज स्थित भवन में लगी आग की लपटें भले ही बुझ गई हों, लेकिन 15 परिवारों का दर्द और चीखें अब भी थमी नहीं हैं। माता-पिता अपने बच्चों की तस्वीरें सीने से लगाए रो रहे हैं और एक ही सवाल पूछ रहे हैं—आखिर जिम्मेदार कौन है?

धुआं बना सबसे बड़ी चुनौती

अधिकारियों के मुताबिक, सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड मात्र दो मिनट में मौके पर पहुंच गई थी, लेकिन असली चुनौती आग नहीं बल्कि घना धुआं था। इमारत इतनी अधिक धुएं से भर गई थी कि दूसरी मंजिल तक पहुंचना मुश्किल हो गया। बचाव के लिए दमकलकर्मियों को पड़ोसी मकान की छत तक जाना पड़ा और वहां से दीवार में चार जगह छेद कर धुआं बाहर निकाला गया। कई घंटों बाद हालात सुधरे, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी और कई लोगों की जान जा चुकी थी।

संकरी इमारत ने बढ़ाया खतरा

सेक्टर-डी स्थित इस कॉम्प्लेक्स में आने-जाने का केवल एक ही संकरा रास्ता था। पहली से तीसरी मंजिल तक पहुंचने वाली सीढ़ियां भी बेहद तंग थीं। आग लगते ही धुआं और लपटें इसी एक रास्ते में भर गईं, जिससे अंदर मौजूद लोग बाहर नहीं निकल सके। जो रास्ता रोज़मर्रा की आवाजाही का साधन था, वही मौत का जाल बन गया।

भवन की वैधता पर गंभीर सवाल

घटना के बाद इमारत की वैधता और उपयोग पर सवाल उठ रहे हैं। यह रिहायशी इलाके में स्थित भवन था, जहां कथित रूप से व्यावसायिक गतिविधियां चल रही थीं। रिकॉर्ड के अनुसार पहले भी इस भवन पर कार्रवाई हुई थी और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन बाद में उसे रोक दिया गया।

अब सवाल उठ रहा है कि यदि पहले से आपत्तियां थीं तो समय-समय पर निगरानी क्यों नहीं हुई, सुरक्षा जांच कैसे अनदेखी रह गई और जिम्मेदारी किसकी थी।

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