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एक छात्रा के लिए 13 साल से रोज 5 KM जंगल पार कर स्कूल जाते हैं शिक्षक, मई 2029 में होंगे रिटायर

by | Sep 13, 2026 | Featured

Maharashtra: महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में 55 वर्षीय शिक्षक जीवन मिथारी की कहानी शिक्षा के प्रति समर्पण की मिसाल है। स्कूल का दिन शुरू होने से पहले वह घने जंगल और दुर्गम रास्तों से करीब 5 किलोमीटर पैदल चलकर जिला परिषद स्कूल पहुंचते हैं। पिछले 13 साल से उनकी यही दिनचर्या है, क्योंकि स्कूल में अब सिर्फ एक छात्रा पढ़ती है।

मिथारी गगनबावड़ा तालुका में सिंधुदुर्ग सीमा के पास स्थित कावलटेक धनगरवाड़ा के स्कूल में पढ़ाते हैं। उन्होंने 26 जुलाई 2013 को यहां कार्यभार संभाला था और तब से लगातार इसी स्कूल में हैं। बारिश और खराब रास्तों के बावजूद उन्होंने जिम्मेदारी से कभी पीछे कदम नहीं खींचे।

खुद चुनी थी दूरदराज स्कूल की पोस्टिंग

इस स्कूल में आना उनके लिए पहले चुनौती थी। तब वह कोल्हापुर जिला प्राथमिक शिक्षक सहकारी बैंक के अध्यक्ष थे। उनका कहना है कि आमतौर पर प्रभावशाली लोगों को बेहतर स्कूलों में पोस्टिंग मिलती थी, जबकि अन्य शिक्षकों को दुर्गम इलाकों में भेजा जाता था। मिथारी ने केवल इतना कहा कि वह जाएंगे और फिर खुद इस दूरदराज स्कूल के लिए आवेदन किया।

100 परिवारों से अब सिर्फ एक छात्रा

मिथारी के मुताबिक, कभी कावलटेक और पड़ोसी आनंदुर धनगरवाड़ा में 70-100 परिवार रहते थे। 2000 के बाद रोजगार और बेहतर जीवन की तलाश में लोग कोल्हापुर शहर की ओर जाने लगे। आबादी घटने के साथ स्कूल में बच्चों की संख्या भी कम होती गई। अब तीसरी कक्षा की स्वरा बोडाके ही अकेली छात्रा है। मिथारी मानते हैं कि बच्चों की संख्या कम होने से शिक्षक का कर्तव्य कम नहीं होता।

जंगल में गौर और तेंदुए का खतरा

स्कूल का रास्ता वन्यजीवों के इलाके से होकर गुजरता है। इस दौरान उन्हें गौर, तेंदुए और अन्य जंगली जानवरों का सामना करना पड़ता है। कई बार उनका सामना गौरों से हो चुका है। स्थानीय लोगों ने उन्हें ऐसे हालात में सावधानी बरतने के तरीके बताए हैं। एक बार बस्ती के पास तेंदुए ने बछड़े को मार दिया था। वन विभाग ने ट्रैप कैमरा लगाया, जिसमें तेंदुए की सैकड़ों तस्वीरें मिलीं। अधिकारियों ने मिथारी को स्कूल आते-जाते रास्ते में कहीं रुकने या बैठने से बचने की सलाह दी।

सबसे नजदीकी स्कूल 5.5 KM दूर

धुंडावाडे का दूसरा स्कूल करीब 5.5 KM दूर है, यानी छोटे बच्चों को रोज लगभग 11 KM आना-जाना पड़ेगा। मानसून में यह मुश्किल और बढ़ जाती है। ग्रामीण छोटी खेती, जलाऊ लकड़ी तथा जामुन और करवंद जैसे वन उत्पादों पर निर्भर हैं। गौरों से फसलों की रक्षा के लिए किसान दोहरी बाड़ लगाते हैं। मिथारी मई 2029 में रिटायर होंगे। उनके मुताबिक जंगल का रोज का सफर अब कसरत जैसा लगता है, लेकिन वह स्कूल के चारों ओर बच्चों की सुरक्षा के लिए चारदीवारी को जरूरी मानते हैं। फिलहाल उनकी दिनचर्या जारी है—रोज 5 KM पैदल चलना और अपनी अकेली छात्रा को पढ़ाना।

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