पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर जिले में DRDO के बहुप्रतीक्षित परीक्षण केंद्र को लेकर अब रास्ता साफ होता दिख रहा है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि जुनपुट में प्रस्तावित DRDO प्रोजेक्ट आगे बढ़ेगा और जरूरी मंजूरियां दी जा चुकी हैं।
जुनपुट में यह सुविधा ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज के अतिरिक्त ऑपरेशनल एरिया के रूप में विकसित की जानी है। इसका उद्देश्य मिसाइल और अन्य हथियार प्रणालियों के परीक्षण की क्षमता बढ़ाना है। DRDO ने 2024 में भी कहा था कि चांदीपुर पर बढ़ते परीक्षण दबाव को देखते हुए अतिरिक्त क्षेत्र की जरूरत है।
8.73 एकड़ में विकसित होगा टेस्ट सेंटर
जुनपुट बंगाल की खाड़ी के किनारे स्थित है। यह चांदीपुर से करीब 70 किलोमीटर, दीघा से लगभग 40 किलोमीटर और कोलकाता से करीब 177 किलोमीटर दूर है।
DRDO के अनुसार प्रस्तावित साइट करीब 8.73 एकड़ में फैली है। जमीन का अधिग्रहण और जरूरी मंजूरियां पहले ही पूरी की जा चुकी थीं। साइट पर सड़क और हार्ड-स्टैंडिंग क्षेत्र का निर्माण भी पूरा हो चुका है।
चांदीपुर पर क्यों बढ़ा दबाव?
ओडिशा का चांदीपुर DRDO के प्रमुख परीक्षण केंद्रों में शामिल है। यहां लंबे समय से विभिन्न मिसाइल और हथियार प्रणालियों के परीक्षण किए जाते रहे हैं।
DRDO ने 2024 में कहा था कि हथियार प्रणालियों के समय पर परीक्षण के लिए जुनपुट में अतिरिक्त ऑपरेशनल एरिया विकसित करने की योजना है। इससे परीक्षण गतिविधियों के लिए उपलब्ध क्षमता बढ़ सकती है।
नए केंद्र का मतलब यह नहीं है कि चांदीपुर की भूमिका खत्म हो जाएगी। बल्कि दोनों स्थानों का इस्तेमाल जरूरत के अनुसार परीक्षण गतिविधियों के लिए किया जा सकेगा।
किस तरह के परीक्षण होंगे?
जुनपुट में किन-किन मिसाइलों या हथियार प्रणालियों का परीक्षण होगा, इसकी पूरी आधिकारिक सूची सार्वजनिक नहीं की गई है। हालांकि, 2024 में रक्षा मंत्रालय ने संसद में कहा था कि यह साइट बहुत महत्वपूर्ण मिसाइलों के परीक्षण के लिए उपयोगी है।
कुछ रिपोर्टों में रडार और शॉर्ट-रेंज मिसाइलों के परीक्षण का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इसे जुनपुट की अंतिम और पूरी परीक्षण सूची नहीं माना जाना चाहिए।
परियोजना में पहले क्यों आई थी रुकावट?
जुनपुट प्रोजेक्ट कई सालों से प्रस्तावित था। जमीन अधिग्रहण और जरूरी मंजूरियों के बाद भी काम आगे नहीं बढ़ सका।
रक्षा मंत्रालय ने अगस्त 2024 में संसद को बताया था कि जमीन अधिग्रहण पूरा हो चुका है। सड़क और हार्ड-स्टैंडिंग का काम भी हो गया था। हालांकि, स्थानीय विरोध के कारण काम अस्थायी रूप से रोक दिया गया था।
स्थानीय मछुआरा संगठनों ने परीक्षण के दौरान समुद्री इलाकों में आवाजाही और मछली पकड़ने पर संभावित प्रतिबंधों को लेकर चिंता जताई थी। इन गतिविधियों का स्थानीय आजीविका पर असर पड़ने की आशंका भी जताई गई थी।
परीक्षण के दौरान लोगों की सुरक्षा कैसे होगी?
DRDO के अनुसार परीक्षणों के दौरान आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा प्राथमिकता होगी। रक्षा मंत्रालय ने संसद में बताया था कि परीक्षण से पहले साइट के 1 किलोमीटर के दायरे में आबादी को अस्थायी रूप से हटाया जाएगा।
प्रभावित लोगों के लिए मुआवजे और सुरक्षित आश्रय की व्यवस्था का भी प्रावधान बताया गया है।
DRDO ने पहले कहा था कि परीक्षण गतिविधियों के दौरान स्थानीय लोगों, खासकर मछुआरों और किसानों की रोजमर्रा की जिंदगी पर असर कम से कम रखने का प्रयास किया जाएगा।
भारत की रक्षा क्षमता के लिए क्यों अहम है यह प्रोजेक्ट?
मिसाइलों और हथियार प्रणालियों का विकास केवल निर्माण तक सीमित नहीं होता। उनके अलग-अलग चरणों में परीक्षण भी जरूरी होते हैं।
जुनपुट के सक्रिय होने से पूर्वी तट पर DRDO की परीक्षण क्षमता बढ़ सकती है। इससे चांदीपुर पर निर्भरता कम करने और परीक्षण कार्यक्रमों को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, परियोजना को आगे बढ़ाते समय स्थानीय मछुआरों की चिंताओं और पर्यावरण से जुड़े पहलुओं का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण होगा।
पश्चिम बंगाल में बढ़ेगा रक्षा क्षेत्र का जुड़ाव
जुनपुट में DRDO की सुविधा बनने से पश्चिम बंगाल का रक्षा अनुसंधान और तकनीकी क्षेत्र से जुड़ाव भी मजबूत हो सकता है।
प्रोजेक्ट के निर्माण और संचालन से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बनने की संभावना है। इसके अलावा, रक्षा क्षेत्र से जुड़े औद्योगिक और तकनीकी निवेश को भी बढ़ावा मिल सकता है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल परियोजना के अगले चरण और निर्माण की गति को लेकर है। राज्य सरकार की ओर से सहयोग का संकेत मिलने के बाद लंबे समय से अटके इस प्रोजेक्ट के आगे बढ़ने की उम्मीद बढ़ी है।

