Sunday, Sep 13

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पश्चिम बंगाल में DRDO के नए मिसाइल टेस्टिंग सेंटर को मंजूरी, चांदीपुर का दबाव होगा कम

West Bengal: पश्चिम बंगाल सरकार ने पूर्वी मेदिनीपुर के जुनपुट गांव में DRDO के नए परीक्षण सुविधा केंद्र को मंजूरी दे दी है। इसका मुख्य उद्देश्य ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज पर बढ़ते दबाव को कम करना है। बंगाल की खाड़ी के किनारे स्थित जुनपुट, चांदीपुर से करीब 70 किलोमीटर दूर है। यहां 8.73 एकड़ में केंद्र विकसित किया जाएगा, जिससे तटीय परीक्षण कॉरिडोर तक सीधी पहुंच मिलेगी।

छोटी दूरी की मिसाइलों और रडार का होगा परीक्षण

चांदीपुर लंबे समय से भारत के प्रमुख मिसाइल परीक्षण केंद्र के रूप में काम कर रहा है। बढ़ते परीक्षणों के चलते वहां काम का दबाव और देरी बढ़ी है। नई सुविधा में छोटी दूरी की मिसाइलों और रडार प्रणालियों का परीक्षण होगा, जबकि चांदीपुर लंबी दूरी की और रणनीतिक मिसाइलों पर केंद्रित रहेगा। इससे परीक्षण क्षमता और गति दोनों बढ़ेंगी।

कई साल से अटकी थी परियोजना

DRDO ने जुनपुट को चांदीपुर के अतिरिक्त परिचालन क्षेत्र के रूप में चुना था। भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण मंजूरी, सड़क और हार्ड-स्टैंडिंग क्षेत्र का काम पहले ही हो चुका था। हालांकि प्रशासनिक अड़चनों और स्थानीय चिंताओं के कारण परियोजना रुकी रही। मछुआरों को समुद्री इलाकों में प्रतिबंध और मछली पकड़ने पर असर की आशंका थी।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पिछली सरकार ने इस मामले में कदम नहीं उठाया, लेकिन अब रास्ता साफ कर दिया गया है। जुनपुट कोलकाता से करीब 177 और दीघा से 40 किलोमीटर दूर है। परीक्षण के दौरान लोगों को अस्थायी रूप से सुरक्षित स्थानों पर ले जाने और मुआवजा देने की व्यवस्था होगी। DRDO सुरक्षा और पर्यावरण को प्राथमिकता देगा।

रक्षा क्षमता और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

चांदीपुर का दबाव घटने से अग्नि जैसी लंबी दूरी की मिसाइलों और अन्य रणनीतिक प्रणालियों के परीक्षण सुचारू हो सकेंगे, जबकि जुनपुट प्रहार जैसी छोटी दूरी की मिसाइलों और रडार के लिए उपयोगी होगा। इससे रक्षा क्षेत्र में निवेश और स्थानीय रोजगार भी बढ़ सकते हैं।

हालांकि मछुआरा समुदाय की चिंताओं, मछली पकड़ने के मौसम और पर्यावरण मानकों का ध्यान रखना जरूरी होगा। दोनों केंद्रों के बीच बेहतर समन्वय भी अहम रहेगा। कुल मिलाकर, यह परियोजना भारत की मिसाइल परीक्षण क्षमता और आत्मनिर्भर रक्षा तैयारियों को मजबूत करने के साथ पश्चिम बंगाल में रक्षा अनुसंधान की भागीदारी बढ़ा सकती है।

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