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मणिपुर में फिर बढ़ा तनाव, मैतेई समुदाय के छह घरों में लगाई आग; दो आरोपी गिरफ्तार

Manipur Violence: मणिपुर के इंफाल वेस्ट जिले में शनिवार को एक बार फिर तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली। लेइमाखोंग आर्मी कैंप के निकट कांटो साबल क्षेत्र में मैतेई समुदाय के छह खाली पड़े मकानों में आग लगा दी गई। घटना के बाद आसपास के इलाकों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया, जबकि सुरक्षा बलों ने हालात को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात कर दिया।

रैली के दौरान आगजनी की घटना

अधिकारियों के अनुसार, दोपहर करीब 12:30 बजे कांगपोकपी जिले से आए लोगों के एक समूह ने कथित तौर पर अंतर-जिला आर्थिक नाकेबंदी के विरोध में निकाली गई रैली के दौरान इन मकानों में आग लगा दी। ये घर मई 2023 में शुरू हुई जातीय हिंसा के बाद से खाली पड़े थे। आगजनी की सूचना मिलते ही इलाके में तनाव बढ़ गया।

सुरक्षा बलों ने संभाला मोर्चा

घटना के बाद आसपास के मैतेई बहुल गांवों के लोग प्रभावित क्षेत्र की ओर बढ़ने लगे। संभावित सामुदायिक टकराव को रोकने के लिए सेना, केंद्रीय सुरक्षा बलों और पुलिस ने रास्ते में ही भीड़ को रोक दिया। हालात बिगड़ते देख सुरक्षा कर्मियों ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया। स्थानीय लोगों के मुताबिक इस दौरान तीन लोगों को मामूली चोटें आईं।

600 लोगों की भीड़ को रोका, दो आरोपी गिरफ्तार

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, करीब 600 लोग प्रभावित क्षेत्र की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन समय रहते कार्रवाई कर बड़े टकराव को टाल दिया गया। आगजनी में कुछ मकान क्षतिग्रस्त हुए, हालांकि आग को अन्य घरों तक फैलने से रोक लिया गया। इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। संयुक्त अभियान के दौरान पुलिस, सीआरपीएफ, रैपिड एक्शन फोर्स और सेना ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हेंगजांग गांव के प्रमुख एवं लेइमाखोंग एरिया प्रोटेक्शन कमेटी के अध्यक्ष कमांग ल्होवुम (65) और खुंखो कूकी गांव निवासी पागिन हैंगशिंग (30) के रूप में हुई है। अन्य संदिग्धों की तलाश में छापेमारी जारी है।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

घटना के बाद स्थानीय लोगों ने सुरक्षा बलों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था होने के बावजूद आगजनी की घटना हुई और जब लोग मौके पर पहुंचना चाहते थे तो उन्हें रोक दिया गया। कई सामाजिक संगठनों ने भी सरकार से सभी समुदायों की समान सुरक्षा सुनिश्चित करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

2023 से जारी है जातीय हिंसा

गौरतलब है कि मई 2023 से मणिपुर में मैतेई और कूकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा का दौर जारी है। इस संघर्ष में अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है, हजारों लोग विस्थापित हुए हैं और राज्य के कई हिस्सों में समय-समय पर तनाव की स्थिति बनी रहती है।

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Deepika Gupta

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