Mecca Defence Alliance Pakistan Saudi Arabia: सऊदी अरब पर हूती हमलों के बाद पाकिस्तान ने संकेत दिया है कि पिछले महीने हुए मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट यानी मक्का डिफेंस अलायंस को सक्रिय किया जा सकता है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि अगर यमन का संघर्ष सऊदी क्षेत्र तक फैलता है तो समझौते का सामूहिक रक्षा प्रावधान लागू हो सकता है।
7 अगस्त को पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने यह समझौता किया था। इससे पहले पाकिस्तान और सऊदी अरब 2025 में स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट कर चुके थे, जिसके सिद्धांतों पर मक्का समझौता आधारित है।
मंगलवार को हूती ड्रोन और मिसाइलों ने सऊदी अरब के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया, जिसमें कम से कम 73 लोग घायल हुए। इसके बाद आसिफ ने कहा कि समझौते में कोई अस्पष्टता नहीं है और एक सदस्य पर बिना उकसावे के हमला सभी सदस्यों पर हमला माना जाएगा। उन्होंने कहा, “जरूरत पड़ने पर हम समझौते की शर्तों का सम्मान करेंगे।” हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि हालात जल्द नियंत्रण में आ जाएंगे और हूतियों को चेताया कि यमन का संघर्ष सऊदी तक फैलाने की कोशिश समझौते को सक्रिय कर सकती है।
Turkiye Today ने एक पाकिस्तानी सूत्र के हवाले से दावा किया कि पाकिस्तान जल्द हूतियों के खिलाफ हवाई हमले कर सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, सैन्य प्राथमिकताओं में हूतियों को सादा और अन्य इलाकों से हटाना शामिल हो सकता है। लेकिन पाकिस्तान का रुख पूरी तरह आक्रामक नहीं दिखता। ख्वाजा आसिफ ने कहा कि हूती गैर-राज्य तत्व हैं और उनसे निपटना यमन के अधिकारियों की जिम्मेदारी होनी चाहिए। विशेषज्ञ मेहरान कामरावा के मुताबिक, इसका संकेत है कि पाकिस्तान सऊदी के किसी नए यमन आक्रमण में शामिल नहीं होना चाहता।
हूती ईरान समर्थित समूह है, जो यमन में सत्ता के लिए संघर्ष कर रहा है। 2015 में सऊदी अरब ने उन्हें कुचलने के लिए यमन में सैन्य हस्तक्षेप किया था, लेकिन वह सफल नहीं हुआ। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच समय-समय पर मिसाइल और हवाई हमले होते रहे। फरवरी में अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद हूती भी संघर्ष में शामिल हो गए और सऊदी बुनियादी ढांचे पर दर्जनों ड्रोन-मिसाइल हमले हुए।
बर्मिंघम यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ ओमर करीम के अनुसार, सऊदी पर बढ़ते हूती खतरे के कारण मक्का समझौते और पाकिस्तान-सऊदी रक्षा समझौते के सक्रिय होने की स्थिति बन सकती है। पाकिस्तान पहले से सऊदी अरब में सैन्य मौजूदगी रखता है और उसके पास राजनीतिक रूप से सऊदी की रक्षा में शामिल होने की इच्छा भी है।
हालांकि, जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मेहरान कामरावा का कहना है कि पाकिस्तान और तुर्की रियाद के किसी आक्रामक यमन अभियान से दूरी बना सकते हैं। उनके मुताबिक, अगर सऊदी 2015 की तरह यमन में सैन्य कार्रवाई करता है तो पाकिस्तानी और तुर्की सैनिक इसमें शामिल न हों। इसलिए मक्का डिफेंस एग्रीमेंट की असली परीक्षा तब होगी, जब सऊदी अरब हूतियों के खिलाफ यमन में सीधे सैन्य अभियान शुरू करे।
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