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‘भारत में मुसलमानों के लिए जगह नहीं’ ऐसा सोचने वाला हिंदू नहीं, न्यूयॉर्क में बोले मोहन भागवत

by | Aug 30, 2026 | News Latest

Mohan Bhagwat Hindu Muslim Statement: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने अमेरिका के न्यूयॉर्क में धार्मिक विविधता और मानवता को लेकर बड़ा बयान दिया है। 29 अगस्त को ‘वन वर्ल्ड, वन ह्यूमैनिटी’ कार्यक्रम में संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अगर कोई हिंदू यह मानता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदुत्व की मूल भावना को नहीं समझता। उन्होंने अलग-अलग धर्मों और पूजा-पद्धतियों के बावजूद मानवता की एकता पर जोर दिया।

‘धर्म अलग हो सकते हैं, इंसानियत एक’

मोहन भागवत ने कहा कि भारतीय परंपरा में यह विचार रहा है कि धर्म और पूजा के तरीके अलग हो सकते हैं, लेकिन मानवता एक है। उनके मुताबिक सत्य एक है, हालांकि अलग-अलग लोग उसे अलग-अलग तरीकों से समझ और व्यक्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि विविधता को स्वीकार करने, उसका सम्मान करने और उसे सुरक्षित रखने की जरूरत है। उनके अनुसार अलग-अलग पहचान के बावजूद लोगों के बीच मूल रूप से एकता का भाव होना चाहिए।

हिंदुत्व को लेकर क्या बोले भागवत?

भागवत ने हिंदुत्व की व्याख्या करते हुए कहा कि भारत की परंपरा सभी समुदायों को साथ लेकर चलने की रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हिंदू विचार में सत्य तक पहुंचने के अलग-अलग रास्ते हो सकते हैं, लेकिन उनका अंतिम लक्ष्य एक ही माना जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि मानवता में किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए और हर व्यक्ति की गरिमा का सम्मान किया जाना चाहिए।

अमेरिका में रहने वाले भारतीयों से भी कही बात

न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित कार्यक्रम में भागवत ने अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों की जिम्मेदारियों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि उनकी जन्मभूमि भारत है, जबकि कर्मभूमि अमेरिका, इसलिए उन्हें अपनी कर्मभूमि के प्रति अपने कर्तव्य को निभाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय मूल के लोग जिस देश में रह रहे हैं, वहां के प्रति अपनी जिम्मेदारी पूरी करें और साथ ही अपनी जन्मभूमि से मिले मूल्यों को भी याद रखें।

दुनिया को एकता का संदेश देने पर जोर

RSS प्रमुख ने कहा कि संगठन की जिम्मेदारी है कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जाकर यह संदेश दिया जाए कि विविधताओं के बावजूद मानवता एक है। उन्होंने भारत की परंपरा में मौजूद ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना का भी उल्लेख किया और विविधता के साथ एकता को समाज की ताकत बताया।

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