क्या हैं आरोप?
Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश कांग्रेस ने मुख्यमंत्री Mohan Yadav और उनके परिवार पर बड़े पैमाने पर भूमि खरीद में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। कांग्रेस का दावा है कि मुख्यमंत्री बनने से पहले और बाद के वर्षों में उनके परिवार और उनसे जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों की जमीनों में असामान्य रूप से वृद्धि हुई है। पार्टी ने इसे संभावित हितों के टकराव (Conflict of Interest), पद के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार का मामला बताया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Jitu Patwari ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुकी है और मुख्यमंत्री के परिवार की बढ़ती भूमि संपत्ति पर जवाब देना जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि 2021 से लेकर 13 दिसंबर 2023 तक, जब मोहन यादव मुख्यमंत्री बने, उनके परिवार के करीबी रिश्तेदारों ने लगभग 194 प्लॉटों में फैली 253 एकड़ जमीन हासिल की। कांग्रेस के अनुसार, परिवार और रिश्तेदारों के पास कुल 245 प्लॉटों में लगभग 335 एकड़ भूमि है।
क्या है पूरा मामला?
कांग्रेस ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के परिवार और उनसे जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों ने दिसंबर 2023 के बाद दो वर्षों में उज्जैन में 137 प्लॉटों के रूप में लगभग 168 एकड़ जमीन खरीदी, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 45 करोड़ रुपये बताई गई है।
पार्टी का आरोप है कि इन जमीनों का बड़ा हिस्सा उन इलाकों में स्थित है जहां नई सड़क परियोजनाएं प्रस्तावित की गईं या जहां Ujjain Master Plan 2035 के तहत कृषि भूमि को आवासीय और व्यावसायिक उपयोग में बदलने की योजना बनाई गई। कांग्रेस का कहना है कि अधिकांश खरीद ऐसे क्षेत्रों में हुई जहां भविष्य में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से जमीनों की कीमत बढ़ने की संभावना थी।
विपक्ष के नेता Umang Singhar ने आरोप लगाया कि मोहन यादव को उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष और बाद में उच्च शिक्षा मंत्री रहते हुए प्रस्तावित सड़कों और विकास परियोजनाओं की जानकारी थी। उन्होंने दावा किया कि उज्जैन मास्टर प्लान शहर के विकास के बजाय मुख्यमंत्री परिवार के रियल एस्टेट हितों को लाभ पहुंचाने के लिए तैयार किया गया है।
सिंघार ने इसे मध्य प्रदेश के सबसे बड़े कथित भूमि घोटालों में से एक बताते हुए "इनसाइडर ट्रेडिंग", "पद के दुरुपयोग" और "भ्रष्टाचार" का मामला करार दिया। कांग्रेस ने इस पूरे प्रकरण को "महाकाल की जमीन की लूट" बताया है।
कांग्रेस की मांगें
कांग्रेस ने मुख्यमंत्री से सार्वजनिक रूप से इन भूमि सौदों पर स्पष्टीकरण देने की मांग की है। पार्टी ने कहा कि इतने गंभीर आरोपों के बाद मुख्यमंत्री को नैतिक आधार पर इस्तीफा देना चाहिए।
जितू पटवारी ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति जीवनभर में लगभग 100 एकड़ जमीन का मालिक रहा हो और मंत्री तथा बाद में मुख्यमंत्री बनने के बाद उसकी भूमि संपत्ति बढ़कर 335 एकड़ हो जाए, तो इसकी जांच होना आवश्यक है। कांग्रेस ने इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में स्वतंत्र न्यायिक जांच से कराने की मांग की है और विधानसभा में भी यह मुद्दा उठाने की बात कही है।
पटवारी ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा "राम मंदिर चंदा चोरी" और "महाकाल भूमि लूट" जैसे मामलों में घिरी हुई है। वहीं उमंग सिंघार ने तंज कसते हुए कहा, "केरल फाइल्स, कश्मीर फाइल्स और एपस्टीन फाइल्स के बाद अब 'मोहन यादव फाइल्स' सामने आ गई हैं।"
मुख्यमंत्री और सरकार का पक्ष
मुख्यमंत्री मोहन यादव या उनके कार्यालय ने इस संबंध में भेजे गए विस्तृत प्रश्नों पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी। हालांकि, राज्य सरकार के कुछ अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि मुख्यमंत्री के परिवार की भूमि खरीद को उनके राजनीतिक पद से जोड़ना उचित नहीं है।
अधिकारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री का विस्तारित परिवार लंबे समय से रियल एस्टेट कारोबार में सक्रिय है और उनके व्यावसायिक लेन-देन को सीधे मुख्यमंत्री के राजनीतिक उदय से जोड़ना सही नहीं होगा।
भाजपा की प्रतिक्रिया
मध्य प्रदेश भाजपा ने कांग्रेस के सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार और राजनीति से प्रेरित बताया है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष Hemant Khandelwal ने कहा कि कांग्रेस जानबूझकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है और आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने दावा किया कि जब भी मध्य प्रदेश में पिछड़ा वर्ग (OBC) से कोई मुख्यमंत्री बना है, कांग्रेस ने उसे कमजोर करने की कोशिश की है। उन्होंने उदाहरण के तौर पर Uma Bharti, Shivraj Singh Chouhan और मोहन यादव का नाम लिया।
खंडेलवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा 2023 में दाखिल नामांकन पत्र के अनुसार उनके नाम पर 17 एकड़ जमीन है और 2026 तक इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की पत्नी सीमा यादव के नाम दर्ज 12.29 एकड़ भूमि में भी कोई वृद्धि नहीं हुई है। इसी तरह मुख्यमंत्री के पुत्र वैभव यादव के नाम 2023 से पहले मौजूद 16 एकड़ भूमि में भी कोई इजाफा नहीं हुआ।
भाजपा नेता ने यह भी कहा कि यह सारी जमीन मास्टर प्लान लागू होने से पहले से उनके नाम पर थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री की पुत्रवधू शालिनी यादव द्वारा 2025 में खरीदी गई 10 एकड़ जमीन मास्टर प्लान क्षेत्र से बाहर स्थित है और किसी विकसित या व्यावसायिक क्षेत्र में नहीं आती।
निष्कर्ष
कांग्रेस का आरोप है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार ने सत्ता में आने के बाद बड़े पैमाने पर ऐसी जमीनें खरीदीं जिन्हें भविष्य की सड़क परियोजनाओं और भूमि उपयोग परिवर्तन से लाभ मिलने वाला था। पार्टी इसे भूमि घोटाला, पद के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार का मामला बताते हुए मुख्यमंत्री के इस्तीफे तथा सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में न्यायिक जांच की मांग कर रही है।
वहीं भाजपा इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कह रही है कि मुख्यमंत्री और उनके निकट परिवार की घोषित भूमि संपत्ति में कोई वृद्धि नहीं हुई है तथा कांग्रेस राजनीतिक कारणों से एक OBC मुख्यमंत्री को निशाना बना रही है।
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