Nepal China Flood: 26 अगस्त को नेपाल की भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ बारिश से नहीं, बल्कि ग्लेशियर टूटने से आई थी। नेपाल के जल एवं मौसम विभाग के मुताबिक, करीब 5,200 मीटर की ऊंचाई पर लांगटांग लिरुंग के उत्तरी हिस्से से ग्लेशियर का बड़ा टुकड़ा टूटा और करीब 1,200 मीटर नीचे ल्हेंदे नदी में गिरा। इससे प्राकृतिक बांध बना और फिर पानी, बर्फ व चट्टानों का सैलाब रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा और चितवन की ओर बह निकला।
चीन में भी मची तबाही
उसी सुबह चीन के शिजांग क्षेत्र में ग्यिरोंग पोर्ट के पास मडस्लाइड हुआ। CCTV के अनुसार कई जगह मलबा पांच फीट से ज्यादा गहरा था, जिससे सड़क और संचार व्यवस्था बाधित हुई। चीन में तीन लोगों की मौत और 558 लोगों के लापता होने की पुष्टि हुई है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बड़े पैमाने पर रेस्क्यू का आदेश दिया है। हालांकि दोनों घटनाओं के एक ही स्रोत से जुड़े होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
नई झील से फिर बाढ़ का खतरा
चीन के जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार छोछेन खोला और पुरेपु त्सांगपो के संगम के पास करीब 20 लाख घन मीटर पानी की बैरियर झील बन गई है और यह ओवरफ्लो भी कर रही है। अगले तीन दिनों में 30 लाख घन मीटर और पानी आने की संभावना है, जिससे झील टूटने का खतरा बढ़ गया है। चीन फ्लड सिमुलेशन कर रहा है। नेपाल ने भोटेकोशी, त्रिशूली और नारायणी के किनारे लोगों को अगले आदेश तक न जाने को कहा है।
पहला सैलाब कितना बड़ा था?
पहली बाढ़ बुधवार सुबह करीब 9 बजे नेपाल पहुंची और चितवन के देवघाट में शाम तक 5,850 घन मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से बह रही थी। करीब 2 करोड़ घन मीटर अतिरिक्त पानी देवघाट से गुजरा, जो 1985 की डिग त्शो ग्लेशियल बाढ़ से कई गुना अधिक था। लहर ने करीब 170 किलोमीटर का सफर कुछ घंटों में तय किया।
हिमालय में बढ़ रही ऐसी घटनाएं
14 महीने में इसी इलाके में यह दूसरी ऐसी बाढ़ है। जुलाई 2025 में भी ग्लेशियर के ऊपर बनी झील से बाढ़ आई थी। ICIMOD के मुताबिक, 2005 के बाद हिमालयी ग्लेशियल झीलों की संख्या करीब 1,900 से बढ़कर 2,600 से ज्यादा हो गई है। क्षेत्र के वैश्विक औसत से तेजी से गर्म होने के कारण ऐसी अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है।
ये भी पढ़े: 2 साल की खुशी बनी भाई की जीवनदाता, स्टेम सेल डोनेशन से सोम ने थैलेसीमिया को दी मात

