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2 साल की खुशी बनी भाई की जीवनदाता, स्टेम सेल डोनेशन से सोम ने थैलेसीमिया को दी मात

by | Aug 27, 2026 | Cover Story Top

Stem Cell Donation: सोम यादव जब सिर्फ पांच महीने का था, तब माता-पिता को पता चला कि वह थैलेसीमिया से पीड़ित है। बीमारी के कारण उसे बार-बार खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती थी। छोटे गांव में रहने वाले गरीब परिवार के लिए हर महीने खून और दवाइयों का इंतजाम करना बड़ी चुनौती था। परिवार में बेटी खुशी के जन्म के बाद डॉक्टरों ने सोम के इलाज के लिए स्टेम सेल ट्रांसप्लांट की सलाह दी, लेकिन कोई मैचिंग डोनर नहीं मिल रहा था।

दो साल की खुशी बनी मैचिंग डोनर

एक हेल्थ कैंप में परिवार को मुफ्त HLA टाइपिंग की सुविधा मिली। जांच में महज दो साल की खुशी अपने भाई सोम के लिए बिल्कुल सही डोनर पाई गई। इसके बाद उसका स्टेम सेल डोनेशन कराया गया और सोम का ट्रांसप्लांट सफल रहा। इस पूरी प्रक्रिया में DKMS Foundation India ने परिवार की मदद की।

अब आम बच्चों की तरह जी रहा सोम

ट्रांसप्लांट के बाद सोम का लगातार फॉलोअप किया गया। करीब दो साल की निगरानी के बाद डॉक्टरों ने उसे फिट घोषित किया। अब वह स्वस्थ है, स्कूल जाता है और दूसरे बच्चों की तरह सामान्य जीवन जी रहा है। डॉ. अजय कुमार के अनुसार, स्टेम सेल ट्रांसप्लांट के बाद मरीज के इम्यून सिस्टम को पूरी तरह मजबूत होने में करीब दो साल लग सकते हैं। इस दौरान बीमारी के दोबारा लौटने की निगरानी की जाती है। कई वर्षों तक बीमारी वापस न आने पर ट्रांसप्लांट को सफल माना जाता है।

क्या है स्टेम सेल डोनेशन?

इस प्रक्रिया में स्वस्थ व्यक्ति से रक्त बनाने वाली स्टेम सेल लेकर ब्लड कैंसर, थैलेसीमिया या अप्लास्टिक एनीमिया जैसे रोगों से जूझ रहे मरीज में ट्रांसप्लांट की जाती हैं। डोनर के शरीर में समय के साथ ये कोशिकाएं फिर पर्याप्त मात्रा में बन जाती हैं।

क्या है थैलेसीमिया?

थैलेसीमिया एक आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें शरीर पर्याप्त हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता। इसके प्रमुख प्रकार थैलेसीमिया मेजर और माइनर हैं। मेजर में मरीज को नियमित रूप से खून चढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है। गंभीर मामलों में बोन मैरो ट्रांसप्लांट उपचार का विकल्प है।

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