Nepal Flash Flood: नेपाल-तिब्बत सीमा के पास उत्तरी नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार को आई भीषण फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचा दी। अधिकारियों के मुताबिक हादसे में कम से कम 9 लोगों की मौत हुई है, जबकि कई लोग अब भी लापता हैं। बाढ़ के पानी में घर, वाहन, पुल और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट बह गए। पानी के तेजी से नीचे की ओर बढ़ने के बाद भारत के बिहार में भी अलर्ट जारी किया गया है।
तिब्बत की ओर से आया पानी, कई इलाके प्रभावित
अधिकारियों के अनुसार सुबह करीब 9 बजे तिब्बत की तरफ से तेज पानी भोटे कोसी नदी में आया, जिससे तिमुरे और स्याफ्रुबेसी सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। तिब्बत के ग्यिरोंग सीमा क्षेत्र में भी भूस्खलन हुआ, जिसमें लोगों के हताहत होने और लापता होने की खबर है।
फ्लैश फ्लड की वजह अभी स्पष्ट नहीं है। नेपाल के बाढ़ पूर्वानुमान विभाग ने कहा कि रसुवा में हुई बारिश इसके लिए जिम्मेदार होने की संभावना कम है। सैटेलाइट तस्वीरों में तिब्बत की ओर भारी बारिश दिखाई दी है। अधिकारी ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) की आशंका की भी जांच कर रहे हैं।
बाजार, पुल और पुलिस चौकियां बहीं
तिमुरे बाजार और सीमा के पास स्थित कस्टम क्षेत्र को भारी नुकसान पहुंचा है। वाहन और सामान पानी में बह गए। पिछले साल की बाढ़ के बाद दोबारा बनाया गया रासुवागढ़ी फ्रेंडशिप ब्रिज भी बह गया।
नेपाल पुलिस की तीन चौकियां—तिमुरे का एरिया पुलिस ऑफिस, स्याफ्रुबेसी पुलिस पोस्ट और रासुवागढ़ी पुलिस पोस्ट—क्षतिग्रस्त हुई हैं। तिमुरे में तैनात नेपाल सशस्त्र पुलिस बल के 9 जवान लापता बताए गए हैं। हाइड्रोपावर परियोजनाओं, सड़कों और अन्य पुलों को भी नुकसान हुआ है। ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक करीब 430 मेगावाट बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई, जो देश की कुल 3.2 गीगावाट स्थापित हाइड्रोपावर क्षमता का 12 प्रतिशत से अधिक है।
हेलीकॉप्टर भी नहीं कर सके लैंड
प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने आपात बैठक कर राहत और बचाव कार्यों की समीक्षा की। नेपाल पुलिस, सेना और सशस्त्र पुलिस बल को अभियान में लगाया गया है। सेना के दो हेलीकॉप्टर प्रभावित इलाकों की ओर भेजे गए, लेकिन पानी का स्तर बहुत ज्यादा होने के कारण स्याफ्रुबेसी और तिमुरे में वे उतर नहीं सके। बाढ़ का पानी त्रिशूली नदी बेसिन की ओर बढ़ा, जिसके बाद नुवाकोट, धादिंग, गोरखा और चितवन के लिए चेतावनी जारी की गई। काठमांडू से रसुवा, नुवाकोट, चितवन और धादिंग जाने वाला यातायात भी रोक दिया गया। गृह मंत्री सुदन गुरूंग ने भोटे कोसी और त्रिशूली के किनारे रहने वालों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की।
तिब्बत में भी तबाही, बिहार अलर्ट
चीन के ग्यिरोंग काउंटी और ग्यिरोंग पोर्ट में भूस्खलन से सड़क, संचार और बिजली व्यवस्था प्रभावित हुई। चीन की सरकारी एजेंसी शिन्हुआ ने इलाके में बड़े पैमाने पर हताहतों और लापता लोगों की जानकारी दी। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने लापता लोगों की व्यापक तलाश और शुरुआती चेतावनी व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए। भोटे कोसी से आया बाढ़ का पानी नारायणी देवघाट तक पहुंच गया है और जलस्तर बढ़ रहा है। नदी किनारे बसे लोगों को सतर्क रहने को कहा गया है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्थिति पर नजर रखने के लिए उच्चस्तरीय टीम गठित की है। मुख्य सचिव और डीजीपी को निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है।
भोटे कोसी तिब्बत से निकलकर नेपाल में बहती है और आगे त्रिशूली नदी तंत्र में मिलती है, जो भारत में गंडक नदी के रूप में प्रवेश करती है। पिछले साल भी भोटे कोसी में आई बाढ़ में 9 लोगों की मौत और 24 लोग लापता हुए थे। उस घटना को बाद में तिब्बत की एक सुप्राग्लेशियल झील के खाली होने से जोड़ा गया था। पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने भी त्रिशूली नदी के आसपास रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और बचाव कार्यों में सहयोग की अपील की है। नेपाल में चीनी दूतावास ने भी आपात प्रतिक्रिया तंत्र सक्रिय कर प्रभावित क्षेत्रों में चीनी नागरिकों और कंपनियों की स्थिति का आकलन शुरू किया है।
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