Nepal: नेपाल में विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद लापता लोगों की तलाश और बचाव अभियान के बीच एक नई मुसीबत खड़ी हो गई है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर टूटने से मलबे से बनी झील अब ओवरफ्लो होने लगी है। इससे प्रभावित इलाकों में दोबारा भीषण बाढ़ आने का खतरा बढ़ गया है। इसी वजह से कुछ समय के लिए बचाव अभियान रोकना पड़ा।
बुधवार को ग्लेशियर ढहने के बाद हुए बर्फ-पत्थर के हिमस्खलन से अचानक भारी मात्रा में पानी, मलबा और कीचड़ नीचे की ओर बहा। इसकी चपेट में नेपाल के रासुवा और नुवाकोट समेत कई इलाके आए। घर, वाहन, सड़कें और पुल बह गए, जबकि कई बस्तियां मलबे में दब गईं। नेपाल और तिब्बत में अब तक कम से कम 475 लोगों की मौत हुई है। नेपाल में 910 और तिब्बत में 558 लोग लापता बताए गए हैं, यानी कुल 1,468 लोग अभी भी लापता हैं। इनमें करीब 644 विदेशी नागरिक होने की रिपोर्ट है।
चीनी अधिकारियों ने शुक्रवार को ग्लेशियर के मलबे से बनी बैरियर झील के ओवरफ्लो होने की पुष्टि की। यह झील ग्यिरोंग पोर्ट से करीब 10 किलोमीटर दूर है और इसमें 20 लाख घन मीटर से अधिक पानी है। नेपाल पुलिस ने भी तिब्बती हिस्से में जल अवरोध टूटने की चेतावनी दी थी। खतरा बढ़ने पर बचाव अभियान अस्थायी रूप से रोक दिया गया, लेकिन स्थिति नियंत्रण योग्य पाए जाने के बाद इसे फिर शुरू कर दिया गया।
नेपाल सरकार ने भोतेकोशी और त्रिशूली नदियों के किनारे रहने वालों के लिए भी अलर्ट जारी किया है।
नेपाल पर्यटन मंत्रालय के अनुसार शुक्रवार को बचाए गए 117 पर्यटकों में 85 भारतीय, 16 चीनी, 9 दक्षिण कोरियाई, 2 इतालवी और 2 अमेरिकी नागरिक शामिल हैं। विदेश मंत्रालय के मुताबिक नेपाल में 290 भारतीय अब भी संपर्क से बाहर हैं और 84 भारतीयों को बचाया जा चुका है। इनमें त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के 63 कर्मचारी भी शामिल हैं। तिब्बत में करीब 200 भारतीयों ने निकासी के लिए मदद मांगी है।
नुवाकोट से रासुवागढ़ी के बीच 42 किलोमीटर की सड़क कई जगह क्षतिग्रस्त हुई है। 35 मोटरेबल पुल, 45 सस्पेंशन ब्रिज और करीब 40 किलोमीटर पक्की सड़कें भी प्रभावित हुई हैं। त्रिशूली और देविघाट हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट समेत अन्य बिजली ढांचे को नुकसान पहुंचा है। त्रिशूली-1 परियोजना की सुरंग में फंसे करीब 350 कर्मचारियों को नेपाली सेना ने बचाया, लेकिन 100 से अधिक लोगों के अब भी फंसे होने की आशंका है।
बालेन शाह के नेतृत्व वाली नेपाल सरकार ने फिलहाल सर्च और रेस्क्यू के लिए विदेशी सहायता की जरूरत नहीं बताई है। भारत, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका और बांग्लादेश मदद की पेशकश कर चुके हैं। नेपाल सेंटर फॉर डिजास्टर मैनेजमेंट के प्रमुख के मुताबिक करीब 800 लोगों को हेलीकॉप्टर और 700 लोगों को जमीनी रास्ते से सुरक्षित निकाला गया है। बचे लोगों तक राहत सामग्री हवाई मार्ग से पहुंचाई जा रही है। हालांकि, कई दूरदराज के इलाके अब भी कटे हुए हैं और मलबे के कारण राहत एवं बचाव कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
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