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उत्तर भारत में बढ़ेगी और तपिश, पहाड़ों पर भी ‘हीट अटैक’! कश्मीर 10°C ऊपर, हिमाचल में टूटे रिकॉर्ड

Weather Update Today: देश में मौसम का मिज़ाज तेजी से बदल रहा है और इस बार गर्मी ने पहाड़ों को भी नहीं बख्शा। जम्मू-कश्मीर से लेकर हिमाचल प्रदेश तक तापमान सामान्य से कई डिग्री ऊपर पहुंच गया है। हालात ऐसे हैं कि कश्मीर घाटी में दिन का तापमान औसत से 9 से 10 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है। मौसम वैज्ञानिक इसे जलवायु परिवर्तन का साफ संकेत मान रहे हैं।

कश्मीर में असामान्य उछाल

भारत मौसम विभाग (IMD) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, कश्मीर डिवीजन के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से 9-10°C ज्यादा रहा। वहीं जम्मू मंडल के इलाकों में यह बढ़ोतरी 4-8°C तक दर्ज की गई।

कश्मीर क्षेत्र में मुजफ्फरबाद में अधिकतम तापमान 28°C तक पहुंच गया, जबकि जम्मू मंडल के मीरपुर में भी पारा 28°C दर्ज हुआ। रात का तापमान भी राहत नहीं दे रहा कश्मीर डिवीजन में न्यूनतम तापमान सामान्य से 2-4°C और जम्मू डिवीजन में 2-3°C अधिक रिकॉर्ड किया गया।

बर्फ की चादर हुई पतली

IMD के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नरेश कुमार के मुताबिक, तापमान में इस असामान्य बढ़ोतरी का असर बर्फबारी पर भी साफ दिख रहा है। कई ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फ की परत सामान्य से कम हो गई है। इससे आने वाले महीनों में जल स्रोतों और पर्यावरण पर असर पड़ सकता है।

हिमाचल में भी टूटा संतुलन

हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी जिलों में भी अधिकतम तापमान सामान्य से 5-6°C ज्यादा दर्ज किया गया है। फरवरी के अंत में इस तरह की गर्मी ने लोगों को हैरान कर दिया है।

दिल्ली-उत्तर भारत में बढ़ेगी गर्मी

मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों में कोई मजबूत वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय नहीं होगा। ऐसे में दिल्ली समेत उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों में तापमान धीरे-धीरे और बढ़ेगा।

आने वाले 7 दिनों में उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के मैदानी इलाकों में अधिकतम तापमान 2-3°C तक और बढ़ सकता है। कई जगहों पर यह सामान्य से 3-5°C अधिक रहने की संभावना है।

हल्की राहत की उम्मीद

हालांकि, 26 से 28 फरवरी और 2 से 3 मार्च 2026 के बीच पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में दो कमजोर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकते हैं। इनके प्रभाव से हल्की बारिश या बर्फबारी की संभावना जताई गई है, लेकिन इससे तापमान में बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं है।

क्या कहता है संकेत?

विशेषज्ञों के अनुसार, पहाड़ी राज्यों में इस तरह का असामान्य तापमान बढ़ना सामान्य मौसमी बदलाव नहीं, बल्कि दीर्घकालिक जलवायु परिवर्तन की ओर इशारा करता है। यदि यही रुझान जारी रहा तो आने वाले समय में ग्लेशियर, जलस्रोत और कृषि पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

फिलहाल, उत्तर भारत के लोगों को फरवरी में ही मार्च-अप्रैल जैसी गर्मी झेलने के लिए तैयार रहना होगा।

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Shagun Chaurasia

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