US-Iran Talks
US-Iran Talks: जिनेवा में आगामी न्यूक्लियर वार्ता से पहले ईरान ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह युद्ध और शांति, दोनों के लिए तैयार है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका की सैन्य मौजूदगी और बढ़ते तनाव के बीच कोई भी टकराव जल्दी ही क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है।
अराघची ने इंडिया टुडे टीवी को दिए इंटरव्यू में चेतावनी दी, "अगर कोई टकराव होता है, तो यह सिर्फ़ ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा। पूरा मिडिल ईस्ट इसमें शामिल हो सकता है। यह बेहद खतरनाक स्थिति होगी।"
ईरान और अमेरिका के बीच तीसरे दौर की वार्ता गुरुवार को जिनेवा में ओमान की मध्यस्थता में होगी। पिछली बातचीत में समझौते की संभावनाओं के लिए "आम गाइडिंग प्रिंसिपल्स" तय किए गए थे, लेकिन यूरेनियम एनरिचमेंट और मिसाइल सीमाओं को लेकर विवाद अभी भी बरकरार है।
अराघची ने उम्मीद जताई कि एक संतुलित और बराबरी वाला समझौता अभी भी संभव है। उन्होंने कहा, "हम पिछली बातचीत पर आधारित समाधान के लिए तैयार हैं। अगर अमेरिकी पक्ष वास्तविक नतीजे पर पहुंचने का इरादा दिखाए, तो समझौता किया जा सकता है।"
ईरान ने स्पष्ट किया कि वह न्यूक्लियर टेक का शांतिपूर्ण उपयोग जारी रखेगा और सीमित यूरेनियम एनरिचमेंट से पीछे नहीं हटेगा। अराघची ने कहा, "हम सिर्फ़ सिविलियन एनर्जी के लिए एनरिचमेंट बनाए रखना चाहते हैं। बातचीत और डिप्लोमेसी ही एकमात्र विकल्प है।"
साथ ही, उन्होंने लंबी दूरी की मिसाइलों को विकसित करने के दावों को खारिज किया। अराघची ने कहा, "हमने जानबूझकर 2,000 किलोमीटर से कम की रेंज रखी है। यह सिर्फ़ हमारी सुरक्षा के लिए है, दुनिया के लिए खतरा नहीं।"
अराघची ने कहा कि अमेरिका की बढ़ती सैन्य मौजूदगी क्षेत्रीय तनाव बढ़ा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया, "अगर मकसद हमें धमकाना है, तो यह सफल नहीं होगा। कोई भी टकराव तेज़ी से फैल सकता है और पूरा मिडिल ईस्ट इसमें शामिल हो जाएगा। पिछली लड़ाई से हमने बहुत कुछ सीखा है और अब हम ज्यादा तैयार हैं। किसी की भी जीत नहीं होगी। यह एक बुरा युद्ध होगा।"
अराघची ने अमेरिका द्वारा ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में हताहतों की संख्या को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि 32,000 मौतों का दावा गलत है, जबकि ईरान ने 3,117 पीड़ितों की सूची सार्वजनिक की है। हालांकि ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स ने अलग आंकड़े पेश किए हैं।
अराघची ने गाजा में इज़राइल के युद्ध की आलोचना करते हुए भारत से फ़िलिस्तीनी मुद्दा उठाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, "भारत हमारे दोस्त हैं। हमारे रिश्ते हमेशा मजबूत रहे हैं। हमें भरोसा है कि भारत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाने में सकारात्मक भूमिका निभा सकता है।"
उन्होंने यह भी कहा, "ईरान और भारत के बीच लंबे समय से चली आ रही साझेदारी को और मजबूत किया जा सकता है। हम चाहते हैं कि दोस्ताना और सहयोगी संबंध जारी रहें।"
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