होम = लाइफस्टाइल = फूड पैकेट पर लिखे ‘100%’ के दावे कितने सच? ब्लड शुगर पर पड़ सकता है असर

फूड पैकेट पर लिखे ‘100%’ के दावे कितने सच? ब्लड शुगर पर पड़ सकता है असर

Packaged Food: आज पैकेज्ड फूड्स पर “100% टेंडर कोकोनट वाटर”, “100% आटा ब्रेड”, “नो एडेड शुगर” और “हनी से बना” जैसे दावे आम हो गए हैं। हाल ही में Central Consumer Protection Authority (CCPA) ने ऐसे बढ़ा-चढ़ाकर किए गए दावों पर कंपनियों पर जुर्माना लगाया। विशेषज्ञों का कहना है कि असली जानकारी पैकेट के पीछे लिखी सामग्री में छिपी होती है, न कि सामने के आकर्षक दावों में।

क्यों भ्रामक हो सकता है ‘नेचुरल शुगर’?

नई दिल्ली के Dr Saptarshi Bhattacharya के अनुसार, यह मायने रखता है कि चीनी भोजन के प्राकृतिक ढांचे में मौजूद है या प्रोसेसिंग के दौरान अलग करके जोड़ी गई है। उदाहरण के लिए, पूरा संतरा फाइबर के कारण धीरे पचता है, जबकि जूस या फ्रूट कॉन्संट्रेट में फाइबर कम होने से शुगर तेजी से अवशोषित होती है। इसलिए सेब और सेब का जूस समान नहीं हैं।

‘हेल्थ हेलो’ का असर

हनी, गुड़, खजूर सिरप या फ्रूट कॉन्संट्रेट वाले उत्पाद अक्सर ज्यादा हेल्दी दिखते हैं, लेकिन इनमें भी पर्याप्त मात्रा में “फ्री शुगर” हो सकती है। WHO के अनुसार, फ्री शुगर कुल दैनिक कैलोरी का 10% से कम और बेहतर स्वास्थ्य के लिए 5% से कम होनी चाहिए। इसमें टेबल शुगर के साथ शहद, सिरप और फ्रूट जूस कॉन्संट्रेट भी शामिल हैं।

‘100% आटा’ हमेशा हेल्दी नहीं

किसी ब्रेड में होल व्हीट या आटा होने का मतलब यह नहीं कि वह पूरी तरह स्वस्थ है। उसमें अतिरिक्त चीनी, सोडियम, इमल्सीफायर और अन्य तत्व भी हो सकते हैं। इसलिए केवल फ्रंट लेबल पर भरोसा नहीं करना चाहिए।

उपभोक्ताओं को क्या करना चाहिए?

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पैकेट के पीछे की सामग्री सूची और न्यूट्रिशन पैनल जरूर पढ़ें। यदि शुगर, सिरप, हनी, फ्रूट कॉन्संट्रेट या ग्लूकोज सिरप जैसी चीजें ऊपर सूचीबद्ध हों, तो उत्पाद में चीनी की मात्रा अधिक हो सकती है। भारत में बढ़ते मधुमेह और मोटापे को देखते हुए लेबल को समझकर खरीदारी करना पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है।

ये भी पढ़े: न IIT, न MIT! 19 साल काआयुष AI से हर महीने कमा रहा ₹1 करोड़