Pahalgam Terror Attack: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में स्थित बैसरन घाटी में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले की साजिश हमले से करीब एक सप्ताह पहले ही सक्रिय हो चुकी थी। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की चार्जशीट में यह खुलासा हुआ है कि आतंकियों ने ट्रेकिंग और मैपिंग ऐप का इस्तेमाल कर हमले की तैयारी की थी।
मोबाइल से मिले अहम डिजिटल सबूत
‘ऑपरेशन महादेव’ के दौरान मारे गए एक आतंकी के मोबाइल फोन से मिले डिजिटल रिकॉर्ड में 15 और 16 अप्रैल की तारीख वाले दो मैप स्क्रीनशॉट मिले हैं। इनमें बैसरन इलाके के आसपास के स्थान चिह्नित थे। जांच एजेंसी का मानना है कि इससे स्पष्ट होता है कि 15 अप्रैल से ही हमले की साजिश पर काम शुरू हो चुका था। जांच के अनुसार, आतंकियों को पाकिस्तान स्थित हैंडलर साजिद जट्ट की ओर से मोबाइल ऐप के जरिए लोकेशन और निर्देश भेजे जा रहे थे।
ऑपरेशन महादेव में मारे गए तीन आतंकी
28 जुलाई 2025 को श्रीनगर के डाचीगाम जंगल क्षेत्र में भारतीय सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन महादेव’ में फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान और हमजा अफगानी मारे गए थे।
स्थानीय लोगों पर मदद का आरोप
जांच में सामने आया कि 21 अप्रैल को तीनों आतंकी स्थानीय निवासी परवेज अहमद के मौसमी ढोक (कच्चे आश्रय) में रुके थे। एनआईए ने परवेज अहमद और उसके चाचा बशीर अहमद जोथड़ को आरोपी बनाया है। एजेंसी का आरोप है कि दोनों ने आतंकियों को भोजन, ठिकाना और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध कराई। गौरतलब है कि 22 अप्रैल को हुए इस हमले में 25 पर्यटकों और एक स्थानीय पोनीवाले सहित कुल 26 लोगों की मौत हुई थी। जांच एजेंसी के अनुसार, आतंकियों ने धार्मिक पहचान के आधार पर पर्यटकों को निशाना बनाया, जिससे यह कश्मीर के सबसे भयावह आतंकी हमलों में से एक बन गया।
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