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संसद सत्र की धमाकेदार शुरुआत, ओम बिरला के खिलाफ प्रस्ताव! वेस्ट एशिया के हालात पर सरकार की ब्रीफिंग

Parliament Session 2026: संसद के बजट सत्र 2026 का दूसरा चरण सोमवार 9 मार्च से शुरू होते ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई। लोकसभा में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने पश्चिम एशिया के तेजी से बदलते हालात पर महत्वपूर्ण बयान दिया। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और इज़राइल की संयुक्त कार्रवाई में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव और संघर्ष की स्थिति पैदा हो गई है।

अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी

सरकार के बयान के साथ ही संसद में सियासी टकराव की स्थिति भी बनती नजर आई। कांग्रेस की अगुवाई वाले विपक्षी दलों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी की चर्चा छेड़ दी है। विपक्ष का आरोप है कि सदन की कार्यवाही के दौरान विपक्ष के नेताओं, खासकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पर्याप्त समय नहीं दिया गया और स्पीकर का रवैया पक्षपातपूर्ण रहा। बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव को करीब 118 सांसदों का समर्थन मिला है, हालांकि इसे आगे बढ़ाने के लिए सदन की औपचारिक मंजूरी जरूरी होगी।

कुछ ऐसे हुई सत्र की शुरुआत

सत्र की शुरुआत दिवंगत सांसदों को श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। लोकसभा में रिकी एंड्रयू जे सिंगकोन, कुमारी सुशीला त्रिरिया, देवी बक्स सिंह, पूर्णमासी राम और केपी उन्नीकृष्णन को याद किया गया। वहीं राज्यसभा में पूर्व सदस्यों मुकुल रॉय, जनार्दन वाघमारे और एच.के. दुआ को श्रद्धांजलि दी गई। राज्यसभा में केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन हटाने से जुड़ी अधिसूचना भी पेश की। यह राष्ट्रपति शासन फरवरी 2025 में संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत लगाया गया था, जिसे बाद में समाप्त कर दिया गया।

इस बीच पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष का असर भारत पर भी पड़ रहा है। सरकार को वहां मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतनी पड़ रही है और बड़ी संख्या में लोगों की निगरानी व निकासी की व्यवस्था की जा रही है।

सत्र में कुल 30 बैठकें प्रस्तावित

2 अप्रैल तक चलने वाले इस सत्र में कुल 30 बैठकें प्रस्तावित हैं। इस दौरान केंद्रीय बजट 2026-27, कई महत्वपूर्ण विधेयकों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विदेशी नीति, सुरक्षा और संसदीय मर्यादा जैसे मुद्दों पर आने वाले दिनों में संसद में तीखी बहस देखने को मिल सकती है।

ये भी पढ़ें: स्टॉक मार्केट धड़ाम, संसद में घमासान! वैश्विक तनाव का असर भारत पर गहराया

Shagun Chaurasia

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