PCOS and pregnancy: पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) एक आम हार्मोनल समस्या है, जिसमें पीरियड्स अनियमित होने के साथ ओव्यूलेशन भी प्रभावित हो सकता है। इससे कुछ महिलाओं को गर्भधारण करने में समय लग सकता है। हालांकि, PCOS का मतलब बांझपन नहीं है। आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. मुग्धा रस्तोगी के मुताबिक, PCOS को सही तरीके से मैनेज किया जा सकता है और हर महिला पर इसका असर अलग होता है। इसलिए इलाज और प्रेग्नेंसी की प्लानिंग भी महिला की स्थिति के अनुसार होनी चाहिए।
वजन और इंसुलिन रेजिस्टेंस भी अहम
PCOS के साथ कुछ महिलाओं में वजन बढ़ना, इंसुलिन रेजिस्टेंस और अन्य मेटाबॉलिक समस्याएं हो सकती हैं। सिर्फ अनियमित पीरियड्स को देखकर यह नहीं कहा जा सकता कि महिला गर्भधारण नहीं कर पाएगी। सेहत और PCOS को कंट्रोल में रखने से गर्भधारण की संभावना बेहतर हो सकती है।
कब करानी चाहिए फर्टिलिटी जांच?
अगर कई महीनों तक पीरियड्स न आएं या महिला प्रेग्नेंसी प्लान कर रही हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए। जरूरत पड़ने पर ओव्यूलेशन, ओवेरियन रिजर्व, वजन और मेटाबॉलिक हेल्थ की जांच की जा सकती है। डॉ. रस्तोगी के अनुसार, PCOS उम्मीद छोड़ने की वजह नहीं है, बल्कि इसे सही तरीके से मैनेज किया जा सकता है।
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