बिहार चुनाव में क्यों डूबी जनसुराज
बिहार: फैज अहमद फैज का एक शेर इन दिनों चर्चा में है दिल ना-उम्मीद तो नहीं नाकाम ही तो है, लम्बी है गम की शाम मगर शाम ही तो है… ये शेर इस वक्त प्रशांत किशोर और उनकी पार्टी जनसुराज के कार्यकर्ताओं पर फिट बैठता है। बिहार चुनाव में प्रशांत किशोर को जो झटका लगा है, वो उनके लिए पचा पाना आसान तो नहीं। लेकिन लगता है कि प्रशांत किशोर इस कड़वे घूंट को पीकर आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं। बिहार चुनाव के नतीजों में मिली करारी शिकस्त के बाद प्रशांत किशोर अब रणनीति को लेकर एक बार फिर रणभूमि में उतरने की तैयारी कर रहे हैं।
एक तरफ जहां हर तरफ प्रशांत किशोर के राजनीति से संन्यास की अटकलें लगाई जा रही हैं तो वहीं दूसरी तरफ PK कुछ और ही प्लान कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक प्रशांत किशोर को बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि उनकी पार्टी बिहार विधानसभा चुनाव में इतनी बुरी तरह फेल हो जाएगी। उन्हें पूरी उम्मीद थी कि जनसुराज अपने प्रदर्शन से सबको चौंका देगी, लेकिन उनका ये अनुमान पूरी तरह से फेल साबित हुआ। आइए आपको बताते हैं कि अब प्रशांत किशोर का आगे का प्लान क्या रहने वाला है।
जनसुराज से जुड़े सूत्रों के मुताबिक प्रशांत किशोर न ही राजनीति छोड़ेंगे और न ही किसी दूसरे करियर का विकल्प तलाशेंगे। पीके एक बार फिर बिहार की जमीन पर पसीना बहाते नजर आने वाले हैं। सूत्रों की मानें तो पिछले 3 सालों से जारी प्रशांत किशोर की पदयात्रा में बिहार का दक्षिणी हिस्सा छूट गया था। तो अब पीके 1 दिसंबर के आसपास फिर से अपनी पदयात्रा शुरू करेंगे। उनकी पिछली पदयात्रा में दक्षिण बिहार छूट गया था। इसलिए अब वह बिहार के दक्षिणी इलाके में पदयात्रा करते नजर आएंगे।
सूत्रों के मुताबिक प्रशांत किशोर इस बार बिहार के पटना, गया, बक्सर, भोजपुर, कैमूर, नालंदा, अरवल, जहानाबाद, गया, शेखपुरा, बांका, खगड़िया, बेगूसराय में पदयात्रा करेंगे। बताया जा रहा है कि प्रशांत किशोर को ऐसे नतीजे की उम्मीद तो नहीं थी, लेकिन वो मानसिक तौर पर पूरी तरह से तैयार थे कि बुरे से बुरे नतीजे आने पर भी आगे क्या रणनीति अपनानी है।
जनसुराज से जुड़े सूत्रों के मुताबिक प्रशांत किशोर पुराने मुद्दों पर ही फोकस करेंगे। पलायन और बेरोजगारी से लेकर शिक्षा और स्वास्थ्य तक पीके उन्हीं मुद्दों को उठाएंगे। हालांकि, उनका तरीका जरूर बदल जाएगा। प्रशांत किशोर कुछ दिनों तक सरकार के कामकाज का इंतजार करेंगे और फिर लोगों को बताएंगे कि सरकार ने उनके साथ जो वादे किए थे, वो पूरे हो पा रहे हैं या नहीं। वो अपनी आगामी यात्राओं में बताएंगे कि बिहार के लोगों ने 'डायरेक्टर बेनिफिट ट्रांसफर' को देखकर एनडीए को वोट तो दे दिया है, लेकिन अब आगे उन्हें मूलभूत सुविधाएं मिल पाएंगी या नहीं।
बता दें कि चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने 2 अक्टूबर 2022 को अपनी पदयात्रा शुरू की थी। तब से लेकर बिहार चुनाव तक पीके लगातार बिहार की जमीन पर पसीना बहाते दिखे। इस दौरान उन्होंने हर उस मुद्दे को उठाया, जो आम आदमी से जुड़ा था। फिर चाहे वह स्कूलों-अस्पतालों की बदहाली का मुद्दा हो या फिर बेरोजगारी के कारण पलायन का मुद्दा।
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