प्रयागराज में शिक्षक भर्ती की मांग को लेकर प्रदर्शन करते प्रतियोगी अभ्यर्थी।
प्रयागराज में प्राथमिक शिक्षक भर्ती और टीजीटी-पीजीटी भर्ती की मांग को लेकर प्रतियोगी छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। सिविल लाइंस स्थित पत्थर गिरजाघर धरना स्थल से अभ्यर्थियों को देर रात हटाए जाने के बाद गुरुवार सुबह एक बार फिर बड़ी संख्या में छात्र वहां पहुंचने लगे।
प्रशासन ने सार्वजनिक स्थान पर भीड़ और धरने को रोकने के लिए बैरिकेडिंग कर दी। पुलिस ने बीएनएसएस की धारा 163 लागू होने का हवाला देते हुए छात्रों को धरना स्थल की ओर जाने से रोक दिया। इसके बावजूद अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते रहे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
प्राथमिक शिक्षक भर्ती के रिक्त पदों को भरने और टीजीटी-पीजीटी भर्ती की मांग को लेकर अभ्यर्थी 5 सितंबर से पत्थर गिरजाघर पर अनिश्चितकालीन धरना और आमरण अनशन कर रहे थे।
बुधवार देर रात पुलिस और प्रशासन की टीम बड़ी संख्या में मौके पर पहुंची। अधिकारियों की मौजूदगी में धरना स्थल को खाली कराया गया। वहां मौजूद तख्त, लाउडस्पीकर और प्रदर्शन से जुड़ा अन्य सामान ट्रकों में भरकर हटा दिया गया।
कार्रवाई के दौरान इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा। सिविल लाइंस में पत्थर गिरजाघर से लेकर कॉफी हाउस तक सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी।
धरने पर बैठे आमरण अनशन कर रहे कुछ अभ्यर्थियों को एंबुलेंस के जरिए वहां से ले जाया गया। वहीं कुछ अन्य प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया।
अभ्यर्थियों ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें जबरन धरना स्थल से हटाया। कार्रवाई के दौरान बनाए गए कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आए, जिनमें छात्र पुलिस कार्रवाई का विरोध करते नजर आए।
देर रात हुई कार्रवाई के बावजूद आंदोलन खत्म नहीं हुआ। गुरुवार को प्रस्तावित महाधरने में शामिल होने के लिए प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आए अभ्यर्थी दोबारा प्रयागराज में जुटने लगे।
धरना स्थल से लगभग 100 मीटर पहले पुलिस ने बैरिकेडिंग कर छात्रों को रोक दिया। इसके बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थी वहीं जमा हो गए और प्रदर्शन शुरू कर दिया।
छात्रों का कहना है कि वे अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे और भर्ती का विज्ञापन जारी होने तक आंदोलन जारी रखेंगे।
प्रयागराज में 1 सितंबर से बीएनएसएस की धारा 163 लागू होने के कारण सार्वजनिक स्थानों पर बिना अनुमति जमावड़े और धरने पर रोक है। प्रशासन इसी व्यवस्था का हवाला देते हुए छात्रों को धरना स्थल तक पहुंचने से रोक रहा है।
हालांकि, अभ्यर्थियों का कहना है कि उनकी मांगें रोजगार और भर्ती से जुड़ी हैं। उनका आरोप है कि सरकार उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय आंदोलन को रोकने की कोशिश कर रही है।
डीएलएड मोर्चा और युवा मंच के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन में प्राथमिक शिक्षक भर्ती के करीब 60 हजार रिक्त पदों को जल्द भरने की प्रमुख मांग की जा रही है।
इसके अलावा टीजीटी-पीजीटी अभ्यर्थी भी अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में खाली पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी करने की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग है कि भर्ती पुरानी नियमावली और पुराने परीक्षा पैटर्न के आधार पर कराई जाए।
रात में धरना स्थल खाली कराए जाने के बाद भी अभ्यर्थियों के तेवर नरम नहीं पड़े हैं। छात्रों ने साफ किया है कि प्रशासन की कार्रवाई के बावजूद उनका आंदोलन जारी रहेगा।
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