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‘आतंकवाद को पनाह देने वाले देश से सिंधु संधि रोकना निर्णायक’: राष्ट्रपति

President Droupadi Murmu: 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि आतंकवादियों और उन्हें समर्थन देने वालों को चाहे वे कहीं भी छिपें, परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय सशस्त्र बलों की आतंकी नेटवर्क के खिलाफ सटीक कार्रवाई करने की क्षमता साबित की है।

सिंधु जल संधि रोकना बताया निर्णायक फैसला

राष्ट्रपति ने आतंकवाद को पनाह देने वाले देश के साथ सिंधु जल संधि के निलंबन को राष्ट्रीय हित में, खासकर किसानों के लिए, निर्णायक कदम बताया। यह संधि सिंधु नदी प्रणाली के जल बंटवारे से जुड़ी भारत-पाकिस्तान व्यवस्था है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ अन्य कदमों के साथ संधि को निलंबित किया था।

नक्सलवाद के खिलाफ प्रगति का जिक्र

मुर्मू ने भारत को नक्सल-मुक्त बनाने की दिशा में हुई प्रगति को बड़ी राष्ट्रीय उपलब्धि बताया। उन्होंने बस्तर में तेज विकास और बढ़ती सांस्कृतिक गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि लंबे समय से वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्र में बदलाव दिखाई दे रहा है।

वैश्विक अस्थिरता के बीच बढ़ रही अर्थव्यवस्था

राष्ट्रपति ने कहा कि दुनिया में युद्ध और अस्थिरता के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर वैश्विक औसत से दोगुने से अधिक रहने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि पिछले दशक में 25 करोड़ से ज्यादा लोग गरीबी से बाहर आए हैं। साथ ही मुफ्त राशन योजना से 80 करोड़ से अधिक लोगों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होने की बात कही।

संसाधनों की कमी से न्याय न रुके

न्याय व्यवस्था पर राष्ट्रपति ने कहा कि न्याय प्रणाली से जुड़े हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि किसी को आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण न्याय से वंचित न होना पड़े। मुर्मू के संबोधन में राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, पाकिस्तान के खिलाफ भारत की रणनीति, आर्थिक विकास, गरीबी उन्मूलन, खाद्य सुरक्षा, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास और न्याय तक पहुंच जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।

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