Private Sector Missile Production India: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा DRDO की तकनीक के जरिए निजी क्षेत्र को पारंपरिक मिसाइल निर्माण की अनुमति दिए जाने के एक दिन बाद मोदी सरकार ने उत्पादन के लिए निजी कंपनियों की पहचान शुरू कर दी है। इनमें 1000-1500 किमी रेंज की Long Range Land Attack Cruise Missile (LACM) और 150-500 किमी रेंज की प्रलय क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल प्रमुख हैं।
कई मिसाइलों के उत्पादन में निजी कंपनियां
Astra Mark-I (110 किमी) और Mark-II (150 किमी) के लिए निजी क्षेत्र को पहले ही टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के तहत RFP जारी किए जा चुके हैं। ICOMM Hyderabad, Bharat Forge, Adani Defence Systems and Technologies, BDL और BEL समेत कंपनियां कई प्रणालियों के उत्पादन में शामिल होंगी। इनमें 100-300 किमी Next Generation Anti-Radiation Missile, 300 किमी तक Rudram-II, UAV-Launched Precision Guided Missile, 100 किमी रेंज की Long Range Glide Bomb (1 टन वारहेड), SAAW (100 किमी, 80 किग्रा वारहेड), 25-30 किमी Quick Reaction Surface-to-Air Missile और 8 किमी Very Short Range Air Defence System शामिल हैं।
इसके अलावा 55 किमी शॉर्ट-रेंज हेलिकॉप्टर लॉन्च्ड NASM, 350 किमी तक Medium Range Naval Anti-Ship Missile, 70 किमी MRAShM और 100 किमी से अधिक रेंज की LRAShM भी निजी उत्पादन के दायरे में हैं। LRAShM के लिए निजी साझेदार अभी तय नहीं हुआ है।
रणनीतिक मिसाइल क्षेत्र की ओर पहला कदम
सरकार का यह कदम रणनीतिक मिसाइल क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने की दिशा में पहला चरण माना जा रहा है। फिलहाल निजी क्षेत्र मिसाइलों के करीब 50 सब-सिस्टम की आपूर्ति करता है। निजी कंपनियों की सीधी एंट्री से मिसाइल उत्पादन क्षमता और संख्या बढ़ने की उम्मीद है। इससे निजी उद्योग और उससे जुड़ी ancillary units को बढ़ावा मिलेगा तथा आत्मनिर्भर भारत अभियान के साथ देश के सैन्य औद्योगिक आधार को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
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