राष्ट्रपति दौरे पर उठा बड़ा सवाल
Droupadi Murmu Event Protocol Violation: पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति के कार्यक्रम के दौरान कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के उत्तर बंगाल दौरे में कार्यक्रम स्थल बदलने और स्वागत व्यवस्था में कमी के आरोपों के बाद केंद्र सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल सरकार से पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। केंद्रीय गृह सचिव ने राज्य के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर शाम तक स्पष्टीकरण देने को कहा है।
यह पूरा मामला तब सामने आया जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू दार्जिलिंग जिले में आयोजित 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने पहुंचीं। मूल रूप से यह कार्यक्रम बिधाननगर (फांसीदेवा ब्लॉक) में आयोजित होना था, जहां संथाल आदिवासी समुदाय के हजारों लोगों के पहुंचने की संभावना थी। लेकिन राज्य प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण का हवाला देते हुए कार्यक्रम को बागडोगरा एयरपोर्ट के पास स्थित गोसाईंपुर इलाके में स्थानांतरित कर दिया।
बताया जाता है कि नया स्थल अपेक्षाकृत छोटा था, जिससे कई लोग कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। राष्ट्रपति ने भी इस बदलाव पर नाराजगी जताई और कहा कि इससे बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम से वंचित रह गए।
सूत्रों के अनुसार राष्ट्रपति के दौरे के दौरान कई अहम प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया। आरोप है कि उन्हें रिसीव करने के लिए राज्य के शीर्ष अधिकारी मौजूद नहीं थे। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, मुख्य सचिव और डीजीपी में से कोई भी कार्यक्रम स्थल पर मौजूद नहीं था। उनकी जगह केवल सिलीगुड़ी के मेयर ने उनका स्वागत किया।
इसके अलावा प्रशासनिक तैयारियों को लेकर भी सवाल उठे हैं। जानकारी के मुताबिक राष्ट्रपति के लिए बनाए गए वॉशरूम में पानी तक उपलब्ध नहीं था और जिस रास्ते से उनका काफिला गुजरा, वहां सफाई व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं थी। सूत्रों का कहना है कि इस लापरवाही के लिए दार्जिलिंग के जिला अधिकारी, सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नर और कुछ अन्य प्रशासनिक अधिकारी जिम्मेदार हो सकते हैं।
इस पूरे विवाद पर अमित शाह ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि पश्चिम बंगाल की सरकार ने राष्ट्रपति पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह घटना देश के संवैधानिक लोकतंत्र के मूल्यों के खिलाफ है और इससे लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले लोगों को ठेस पहुंची है। गृह मंत्री ने कहा कि इस तरह का व्यवहार यह दिखाता है कि राज्य सरकार में प्रशासनिक अव्यवस्था और गिरावट कितनी गहरी हो चुकी है।
वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रपति का पूरा सम्मान करती हैं, लेकिन हर कार्यक्रम में व्यक्तिगत रूप से शामिल होना संभव नहीं होता। ममता बनर्जी ने कहा कि वह उस समय एक धरने में व्यस्त थीं और जिस सम्मेलन की बात हो रही है, उसके बारे में राज्य सरकार को पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई थी।
उन्होंने यह भी दावा किया कि कार्यक्रम के आयोजन, फंडिंग और तैयारियों को लेकर राज्य प्रशासन को आधिकारिक तौर पर कोई सूचना नहीं दी गई थी। उनके मुताबिक जब भी राष्ट्रपति राज्य में आती हैं तो सामान्य प्रोटोकॉल की जानकारी दी जाती है, लेकिन इस विशेष अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के बारे में राज्य सरकार को कोई औपचारिक सूचना नहीं मिली।
अब इस पूरे विवाद पर केंद्र सरकार की नजर पश्चिम बंगाल सरकार की रिपोर्ट पर टिकी हुई है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही यह तय होगा कि प्रोटोकॉल उल्लंघन के मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इस मुद्दे ने केंद्र और राज्य सरकार के बीच राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है।
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