Pune: पुणे जिले में तीन साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में विशेष न्यायाधीश आर.एस. सालुंखे ने आरोपी को तीन बार मौत की सजा सुनाई है। घटना के दो महीने से भी कम समय में यह फैसला सुनाते हुए अदालत ने इसे 'दुर्लभ से दुर्लभतम' (rarest of the rare) श्रेणी का मामला माना।
'इंद्रियों से अनुभव' करना
सजा सुनाने से पहले न्यायाधीश ने कहा कि अदालत को केवल तथ्यों पर विचार नहीं करना, बल्कि उन्हें अपनी 'इंद्रियों से अनुभव' करना चाहिए। उन्होंने बच्ची की आखिरी चीख (सीसीटीवी में दर्ज), उसकी मासूमियत, शरीर पर आई 18 गंभीर चोटों और माता-पिता के दर्द को महसूस करने की बात कही। उन्होंने कहा कि बच्ची ने आरोपी पर भरोसा किया था, यह जाने बिना कि यह उसकी अंतिम यात्रा है। न्यायाधीश ने आरोपी के अमानवीय व्यवहार की कड़ी निंदा की।
जन आक्रोश और न्याय प्रणाली
न्यायाधीश ने मुंबई-बेंगलुरु राजमार्ग पर हुए जन आक्रोश का भी उल्लेख किया, जहाँ लोग कानून से निराश होकर आरोपी को अपने हवाले करने की मांग कर रहे थे। उन्होंने सवाल किया कि ऐसी जन धारणा क्यों बनती है कि कानून लागू करने वाली एजेंसियां काम नहीं कर रही हैं।
न्याय की गति और टीम वर्क
न्यायाधीश ने एक रूपक (Metaphor) का उपयोग करते हुए कहा कि सामान्यतः न्याय प्रणाली 'ओवरलोडेड ट्रक' की तरह धीमी है, लेकिन यह मामला एक 'चार-सीटर कार' की तरह तेजी से चला। जांच एजेंसी ने 16 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल की और विशेष लोक अभियोजक व रक्षा वकील (Legal Aid) की टीम ने 16 दिनों में ही 55 गवाहों के बयान दर्ज करवाकर सुनवाई पूरी की। न्यायाधीश ने पुलिस, गवाहों, वकीलों और कोर्ट स्टाफ के सामूहिक प्रयासों की सराहना की, जिन्होंने बिना किसी देरी के इस मामले को एक महीने के भीतर निष्कर्ष तक पहुंचाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यद्यपि यह मामला एक अपवाद है, लेकिन यह न्याय प्रशासन में टीम वर्क का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
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