Raghav Chadha PM Modi Meeting: राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर साझा करते हुए इसे अपने जीवन का यादगार क्षण बताया। तस्वीर में राघव चड्ढा प्रधानमंत्री मोदी को भगवान गणेश की प्रतिमा भेंट करते दिखाई दे रहे हैं। उनकी पोस्ट के बाद राजनीतिक हलकों में इस मुलाकात को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
सोशल मीडिया पोस्ट में जताया आभार
राघव चड्ढा ने अपने संदेश में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात उनके लिए सम्मान और सीखने का अवसर रही। उन्होंने लिखा कि दोनों के बीच विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई और प्रधानमंत्री के अनुभवों तथा मार्गदर्शन से उन्हें काफी कुछ सीखने को मिला। उन्होंने प्रधानमंत्री के समय और सहयोग के लिए आभार भी व्यक्त किया।
जनहित के मुद्दों को लगातार उठा रहे हैं राघव
पिछले कुछ समय में राघव चड्ढा ने संसद में कई ऐसे मुद्दे उठाए हैं जो सीधे आम लोगों से जुड़े हैं। उन्होंने महंगाई, मध्यम वर्ग की चुनौतियों, हवाई अड्डों पर महंगे खाद्य पदार्थों की कीमतों और गिग वर्कर्स की सामाजिक सुरक्षा जैसे विषयों पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। हाल ही में उन्होंने डॉक्टरों और डायग्नोस्टिक सेंटरों के बीच कथित रेफरल कमीशन या ‘कट मनी’ के मुद्दे को भी राज्यसभा में उठाया था। उनका कहना था कि इस तरह की व्यवस्था मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालती है और इसकी पारदर्शी जांच होनी चाहिए।
NEET विवाद पर भी दे चुके हैं बयान
NEET परीक्षा से जुड़े विवाद के दौरान राघव चड्ढा की चुप्पी को लेकर सवाल उठे थे। इस पर उन्होंने राज्यसभा में कहा था कि विपक्ष और सत्ता पक्ष में भूमिका अलग-अलग होती है। उनके अनुसार, विपक्ष में रहते हुए सवाल उठाना प्राथमिक जिम्मेदारी होती है, जबकि सत्ता पक्ष का हिस्सा बनने के बाद समाधान तलाशना अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।
नए सांसदों के साथ संवाद पर जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल के महीनों में नए और नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसदों के साथ लगातार संवाद कर रहे हैं। उन्होंने सांसदों को संसद की कार्यवाही में सक्रिय भागीदारी, विषयों की गहन तैयारी और जनहित के मुद्दों पर गंभीर चर्चा करने की सलाह दी है। इसी क्रम में विभिन्न दलों से आए सांसदों के साथ उनकी कई अनौपचारिक बैठकों का आयोजन भी हुआ है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राघव चड्ढा की यह मुलाकात केवल एक औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि राजनीतिक और संसदीय संवाद के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि बैठक में हुई विस्तृत चर्चा का पूरा ब्योरा सामने नहीं आया है, लेकिन राघव चड्ढा द्वारा इसे यादगार और प्रेरणादायक बताने के बाद इस मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
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