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राहुल गांधी मानहानि केस में बरी, अब फैसले को चुनौती देगा शिकायतकर्ता पक्ष

Rahul Gandhi Defamation Case: सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को मानहानि के मामले में बरी कर दिया है। यह मामला कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़ा है। अदालत के फैसले के बाद शिकायतकर्ता पक्ष ने इसे अपीलेट कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है। शिकायतकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे वकील संतोष पांडे के मुताबिक, अदालत के आदेश की प्रति मिलने के बाद उसका अध्ययन किया जाएगा और फिर अपील दाखिल की जाएगी। इस मामले में बयान की सीडी की प्रामाणिकता, टिप्पणी के मानहानिकारक होने और शिकायत दर्ज कराने के अधिकार जैसे मुद्दे अहम रहे हैं।

कोर्ट के फैसले पर शिकायतकर्ता पक्ष ने क्या कहा?

वकील संतोष पांडे ने आज तक से बातचीत में कहा कि शिकायतकर्ता पक्ष फैसले के खिलाफ अपीलेट कोर्ट में अपील करेगा। उनके अनुसार, मामले में अदालत के सामने तीन प्रमुख सवाल थे—राहुल गांधी के बयान वाली सीडी की प्रामाणिकता, बयान को मानहानिकारक माना जा सकता है या नहीं और शिकायत दर्ज कराने का अधिकार किसे है। संतोष पांडे ने बताया कि अदालत ने बयान की सीडी को सही माना, लेकिन टिप्पणी को मानहानिकारक नहीं माना। साथ ही, शिकायत दर्ज कराने के अधिकार को लेकर भी सवाल उठाया गया। शिकायतकर्ता पक्ष अब इन्हीं कानूनी पहलुओं के आधार पर फैसले को चुनौती देने की तैयारी कर रहा है।

2018 में हुई थी मामले की शुरुआत

इस मानहानि मामले की शुरुआत 8 मई 2018 को हुई थी। उस समय कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान बेंगलुरु में राहुल गांधी के अमित शाह को लेकर दिए गए कथित आपत्तिजनक बयान पर विवाद हुआ था। इसके बाद बीजेपी नेता विजय मिश्र ने 4 अगस्त 2018 को सुल्तानपुर की अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का परिवाद दाखिल किया। इसी शिकायत के आधार पर आगे की कानूनी कार्यवाही चली और राहुल गांधी को अदालत में पेश होकर अपना पक्ष रखना पड़ा।

राहुल गांधी मानहानि केस की पूरी टाइमलाइन

8 मई 2018
अमित शाह पर टिप्पणी को लेकर विवाद
कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान बेंगलुरु में राहुल गांधी के अमित शाह को लेकर दिए गए कथित आपत्तिजनक बयान पर विवाद हुआ।

4 अगस्त 2018
अदालत में शिकायत दर्ज
बीजेपी नेता विजय मिश्र ने राहुल गांधी के खिलाफ सुल्तानपुर की अदालत में मानहानि का परिवाद दाखिल किया।

27 नवंबर 2023
राहुल गांधी को तलब किया गया
उपलब्ध टाइमलाइन के मुताबिक, अदालत ने राहुल गांधी को तलब करने की कार्यवाही की और वारंट जारी किया।

20 फरवरी 2024
अदालत में पेशी और जमानत
राहुल गांधी अदालत में पेश हुए और इसके बाद उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया।

26 जुलाई 2024
राहुल गांधी का बयान दर्ज
मामले में राहुल गांधी का बयान अदालत में दर्ज किया गया।

9 अक्टूबर 2024
शिकायतकर्ता की गवाही
बीजेपी नेता और परिवादी विजय मिश्र की गवाही दर्ज की गई।

28 फरवरी 2025
गवाह अनिल मिश्र की गवाही
परिवादी पक्ष के गवाह अनिल मिश्र ने अदालत में अपना बयान दर्ज कराया।

8 दिसंबर 2025
रामचंद्र दुबे का बयान
परिवादी पक्ष के गवाह रामचंद्र दुबे की गवाही दर्ज हुई।

20 फरवरी 2026
धारा 313 के तहत बयान
राहुल गांधी का आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 313 के तहत बयान दर्ज किया गया।

12 मार्च 2026
वॉयस सैंपल मिलान की मांग
बयान की रिकॉर्डिंग से राहुल गांधी के वॉयस सैंपल का मिलान कराने के लिए अदालत में अर्जी दाखिल की गई।

2 मई 2026
मजिस्ट्रेट कोर्ट ने अर्जी खारिज की
मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा ने वॉयस सैंपल मिलान कराने की मांग वाली अर्जी खारिज कर दी।

21 मई 2026
सेशन कोर्ट में निगरानी अर्जी
मजिस्ट्रेट कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सेशन कोर्ट में निगरानी अर्जी दाखिल की गई।

15 जुलाई 2026
ADJ कोर्ट से राहत नहीं मिली
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने निगरानी अर्जी खारिज कर दी।

10 सितंबर 2026
इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका खारिज
न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने वॉयस सैंपल के मिलान से जुड़ी याचिका खारिज कर दी।

6 अक्टूबर 2026
मानहानि मामले में बहस शुरू
राहुल गांधी के खिलाफ दाखिल परिवाद पर अदालत में बहस शुरू हुई।

12 अक्टूबर 2026
दोनों पक्षों की बहस पूरी
मामले में दोनों पक्षों की दलीलें पूरी हुईं और फैसले का इंतजार शुरू हुआ।

26 अक्टूबर 2026
राहुल गांधी मानहानि केस में बरी
सुबह 11 बजे राहुल गांधी का काफिला सुल्तानपुर कोर्ट परिसर पहुंचा। करीब 10 मिनट बाद वह कोर्ट रूम में पहुंचे। सुबह 11:50 बजे अदालत ने उन्हें मानहानि के मामले में बरी कर दिया। दोपहर 12:05 बजे वह कोर्ट रूम से बाहर आए और 12:15 बजे कोर्ट परिसर से निकलकर लखनऊ के रास्ते दिल्ली के लिए रवाना हो गए।

अब आगे क्या होगा

राहुल गांधी को बरी किए जाने के बाद अब शिकायतकर्ता पक्ष अदालत के फैसले को चुनौती देने की तैयारी में है। वकील संतोष पांडे के अनुसार, पहले आदेश की प्रति लेकर उसका अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद अपीलेट कोर्ट में अपील दाखिल की जाएगी। शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि अदालत ने बयान की सीडी को सही माना, लेकिन टिप्पणी को मानहानिकारक नहीं माना। इसके अलावा शिकायत दर्ज कराने के अधिकार पर भी सवाल उठाया गया है। अब मामले में आगे की कार्रवाई अपील दाखिल होने और ऊपरी अदालत में होने वाली सुनवाई पर निर्भर करेगी।

ये भी पढ़ें: अरुणाचल बॉर्डर पर तनाव के बीच चीन का पहला बयान, बोला- समझौतों के मुताबिक करते हैं पेट्रोलिंग

Lavanya Dayal

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