Ram Janmabhoomi: अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सोमवार को महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए। यह फैसला राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले को लेकर हुई तीन घंटे से अधिक चली बैठक में लिया गया। बैठक में कथित गबन की जांच की समीक्षा और आगे की प्रशासनिक कार्रवाई पर भी चर्चा हुई।
ट्रस्ट ने जताया दुख, नियमों के तहत स्वीकार हुए इस्तीफे
बैठक के बाद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने बताया कि चंपत राय और अनिल मिश्रा द्वारा दिए गए इस्तीफे ट्रस्ट के नियमों के अनुसार स्वतः स्वीकार हो गए। उन्होंने कहा, "जो हुआ उससे हम दुखी और शर्मिंदा हैं।"
11 जुलाई की जगह 6 जुलाई को बुलाई गई बैठक
गोविंद गिरी ने बताया कि ट्रस्ट की बैठक पहले 11 जुलाई को प्रस्तावित थी, लेकिन चढ़ावा गबन मामले के घटनाक्रम को देखते हुए इसे पहले ही 6 जुलाई को आयोजित किया गया। बैठक में ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास, शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, युग पुरुष स्वामी परमानंद, स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ, नवनियुक्त ट्रस्टी कृष्ण मोहन और अयोध्या के जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी मौजूद रहे। चंपत राय और अनिल मिश्रा बैठक में शामिल नहीं हुए।
गबन मामले की जांच पर हुई समीक्षा
बैठक दोपहर 3:15 बजे राम जन्मभूमि परिसर स्थित अतिथि गृह में शुरू हुई और शाम 6:30 बजे समाप्त हुई। इसमें विशेष जांच दल (SIT) की जांच की प्रगति, दोनों पदाधिकारियों के इस्तीफों और भविष्य की नियुक्तियों पर विचार किया गया। सुरक्षा कारणों से बैठक का स्थान मणिराम दास छावनी से बदलकर मंदिर परिसर कर दिया गया था और पूरे क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा।
SIT कर रही विस्तृत जांच
कथित चढ़ावा गबन का मामला 7 जून को सामने आया था, जिसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने SIT का गठन किया। प्रारंभिक जांच के आधार पर 25 जून को एफआईआर दर्ज की गई और चढ़ावे की गिनती से जुड़े कई लोगों को गिरफ्तार किया गया। SIT नकद दान के साथ-साथ सोना, चांदी, आभूषण और अन्य कीमती चढ़ावे का भी ऑडिट कर रही है। इस मामले पर विपक्ष ने पारदर्शिता की मांग करते हुए स्वतंत्र जांच की भी मांग उठाई है।
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